भास्कर न्यूज| कोडरमा सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स (सीटू ) ने लार्सन एंड टूब्रो (एलएंडटी) के चेयरमैन एस एन सुब्रह्मण्यम के उस बयान की कड़ी निंदा की है. जिसमें उन्होंने सप्ताह में काम के घंटे बढ़ाकर 90 घंटे करने की बात की है। इससे पहले इंफोसिस के प्रमुख एन.आर. नारायण मूर्ति ने सप्ताह में 70 घंटे काम करने की बात की थी। सीटू के राज्य सचिव संजय पासवान ने कहा कि ऐसा लगता है कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कॉर्पोरेट-सांप्रदायि क नापाक गठजोड़ में श्रमिकों के खून-पसीने की लूट की होड़ मची हुई है। मोदी सरकार के नए लेबर कोड में काम के घंटे को 12 घंटे का प्रावधान है। इसके लिए कॉरपोरेट के माध्यम से देश में माहौल बनाया जा रहा है। सीटू नेता ने कहा कि कैसी विडम्बना है कि कार्यावधि बढ़ाने के लिए चर्चा तो कर रहे हैं, लेकिन मजदूरों को न्यूनतम वेतन भुगतान के लिए कोई चर्चा नहीं है। आठ घंटे काम का का निर्धारण का गौरवशाली इतिहास है। 138 वर्ष पहले 3 से 4 मई 1886 को शिकागो शहर के हे मार्केट में मजदूरों का ऐतिहासिक आंदोलन हुआ। मजदूरों के जमात को तितर – बितर करने के लिए कई राउंड गोलियां चलाई गई। दर्जनों मजदूर शहीद हुए। मजदूरों ने अपने शहीद हुए मजदूर साथी के खून से सने कपड़े को आसमान में लहरा दिया। ऐतिहासिक कुर्बानी भरे संघर्ष के बाद बने विभिन्न श्रम अधिनियमों के अनुसार भारत में सप्ताह के कार्य घंटे 48 तय हुआ। 18 घंटा काम करने का दंभ भरने वाले पीएम मोदी, 70 घंटे काम का नसीहत देने वाले नारायणमूर्ति और 90 घंटे काम करने की फिलॉसफी बताने वाले सुब्रह्मण्यम साहब सब के सब मेहनतकश और मानव विरोधी हैं। सीटू मजदूर वर्ग से आह्वान करता है कि वे पूंजीपति वर्ग और मोदी सरकार की षडयंत्रकारी कदम और मजदूरों को गुलाम बनाने वाली चार लेबर कोड के खिलाफ एकजुट देशव्यापी प्रतिरोध कार्रवाइयों के लिए तैयार रहें। 19 जनवरी को किसान मजदूर एकता दिवस के दिन इंफोसिस और एलएंडटी प्रमुखों का पुतला जलाएं।


