बिल्डर कंपनी के फैसले रद्द, एयरोपोलिस सिटी में प्लॉट खरीदने वाले 500 लोग फंसे

मोहाली सेक्टर-66ए ​स्थित सुखम इंफ्रास्ट्रक्चर और येलोस्टोन लैंडमार्क इंफोसिटी (एयरोपोलिस सिटी) की जमीन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने साल 2008 का स्टेटस बहाल करने का फैसला सुनाया है। मतलब कंपनी के 2008 के बाद के सभी फैसले रद‌्द कर दिए गए हैं। इसका असर उन 500 से ज्यादा लोगों पर पड़ेगा, जिन्होंने प्रोजेक्ट में प्लॉट खरीदे थे। दरअसल, लुधियाना निवासी तेजिंदर भाटिया और राजेश सिंह ने सुखम इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड नाम से कंपनी बनाकर 2006-07 में मोहाली सेक्टर-66ए में 120 एकड़ जमीन खरीदी थी। दोनों की कंपनी में 51-49% की हिस्सेदारी थी। राजेश की शिकायत के अनुसार 2006-07 में तेजिंदर ने दस्तावेजों और खाली पेपर्स पर साइन करवा लिए और उसका हिस्सा घटा दिया। डायरेक्टर पद से हटा दिया। मामला कंपनी लॉ बोर्ड (सीएलबी) नई दिल्ली, पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट गया। अब 11 दिसंबर, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने फाइनल सुनवाई के बाद सभी अन्य फैसलों को खारिज करते हुए 2008 का स्टेटस-को बहाल कर राजेश सिंह को कंपनी में हिस्सेदार के तौर पर स्थापित कर दिया। 2008 के बाद की कंपनी की सभी डील रद्द कर दी गईं। 16 साल पहले पूरे प्रोजेक्ट के लिए 120 एकड़ जमीन खरीदने के लिए ‌~70 करोड़ का निवेश किया गया था। अब इस जमीन का बाजार मूल्य ~1500 करोड़ से अधिक है। न गमाडा से पास-न रेरा से, अरबों में बेचे प्लॉट, अरनोय ग्रुप ने भी इन्वेस्ट किया है सोहाना थाने में तेजिंदर भाटिया और उसकी पत्नी परमजोत कौर पर 6 जुलाई, 2024 को मामला दर्ज किया गया था। वहीं, परमजोत को हैदराबाद एयरपोर्ट पर विदेश जाने से रोका था। मोहाली पुलिस उनको मोहाली लाने भी गई थी, पर कुछ कारणों से उन्हें छोड़ दिया गया। पंचकूला निवासी अंशू सिंगला ने बताया था कि उनकी कंपनी ने तेजिंदर और उनकी पत्नी के साथ एरोपोलिस सिटी में 51624 वर्ग-गज जमीन का सौदा 78 करोड़ में किया था। 11 लाख का बयाना भी किया था। 6 माह बाद प्रोजेक्ट से संबंधित मंजूरी भाटिया और उसकी पत्नी को लेकर उन्हें देनी थीं। उन्होंने हेराफेरी कर जमीन बेच डाली। वहीं, ट्राईसिटी के अरनोय ग्रुप ने भी इस प्रोजेक्ट में 50 हजार वर्ग-गज जमीन खरीदी है। ग्रुप चेयरमैन दिनेश सिंगला ने कहा कि शिकायत दी है। यहां निवेश करने वालों को पजेशन ही नहीं मिला सुखम इंफ्रास्ट्रक्चर और येलोस्टोन लैंडमार्क इंफोसिटी को नए नाम एयरोपोलिस के तौर पर ब्रांड किया गया। अप्रैल 2018 में एयरपोलिस इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाई गई। इसके बाद एससीओ और हाउसिंग प्लॉट बेचे गए। लेकिन एयरोपोलिस प्रोजेक्ट न गमाडा और न पंजाब रेरा से पास है। इस वजह से प्रोजेक्ट में निवेश करने वालों को पजेशन ही नहीं मिला। कई लोग कंज्यूमर कोर्ट और पंजाब रेरा में केस दर्ज करवा चुके हैं। सुप्रीम फैसले से अरबों रुपए की प्रॉपर्टी फंसी

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