अमृतसर | श्री अकाल तख्त साहिब पर तख्तों के सिंह साहिबान की रविवार को हुई बैठक में सिख मर्यादाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। पैलेस-रिसॉर्ट या अन्य खुले स्थानों में आनंद कारज, एआई से सिख गुरुओं से जुड़ी धार्मिक फिल्में बनाने और सिखों के आंतरिक मामलों में राजनीतिक हस्तक्षेप पर रोक लगाई गई। बैठक के बाद श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार कुलदीप सिंह गड़गज्ज ने गायब 328 पावन स्वरूपों के मामले में सरकार को दखलअंदाजी पर चेताया। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर सरकार ने सिख कौम के धार्मिक मामलों, विशेषकर पावन स्वरूपों के मामले में दखलअंदाजी बंद न की तो पंथक परंपराओं, सिख सिद्धांतों एवं मर्यादा के तहत कार्रवाई की जाएगी। जत्थेदार ने स्पष्ट किया कि सिंह साहिबान की अगली बैठक में इस मामले पर फिर विचार किया जा सकता है। जरूरत पड़ी तो प्रकरण के आरोपी 16 पूर्व अधिकारियों को फिर श्री अकाल तख्त पर तलब किया जा सकता है। सरकार के सहयोग से केस दर्ज करवाने वाले सिख सद्भावना दल के प्रमुख सेवादार भाई बलदेव सिंह वडाला को भी तलब किया जा सकता है। जत्थेदार ने एसजीपीसी को इस प्रकरण में एसआईटी को सहयोग न देने तथा पूर्व 16 अधिकारियो को एसआईटी के आगे पेश नहीं होने की भी हिदायत दी है। वहीं, जत्थेदार गड़गज्ज ने बताया कि सर्वसम्मति से फैसला लिया गया कि आनंद कारज केवल गुरुद्वारों में ही होगा। किसी भी अन्य स्थान पर इसकी अनुमति नहीं दी जाएगी। श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी के पावन स्वरूप को किसी भी विवाह स्थल पर ले जाने पर प्रतिबंध लगाया गया है। टकराव बढ़ेगा: सरकार कर सकती है हाईकोर्ट का रुख जत्थेदार साहिबान द्वारा रविवार को अचानक बैठक बुलाकर फैसले लेने की कार्यवाही दर्शाती है कि एसआईटी ने जांच के लिए एसजीपीसी से संपर्क साधने शुरू कर दिए हैं। कानूनी दांव-पेंच से बचने के लिए दूसरे रास्ते अपनाए जा रहे हैं। एसजीपीसी श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के फरमान का उल्लंघन नहीं कर सकती। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और एसजीपीसी के बीच टकराव बढ़ेगा। एसजीपीसी के रुख की काट के लिए सरकार को कोर्ट जाना पड़ेगा। इससे पावन स्वरूपों के मामले की जांच लटक सकती है।


