आज ही के दिन 359 साल पहले इस धरती पर शौर्य और बलिदान के प्रतीक कलगीधर दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह महाराज का पटना साहिब में अवतरण हुआ था। उनकी जयंती के उपलक्ष्य में शहर के गुरुद्वारों में विशेष दिवस सजाए गए और रागियों ने शबद गायन के माध्यम से संगत को प्रभु चरणों से जोड़ते हुए बताया कि खालसा बहादुर और नि:स्वार्थ का प्रतीक बन गया। श्री गुरुनानक सत्संग सभा ने कृष्ण नगर कॉलोनी गुरुद्वारा और श्री गुरु सिंह सभा ने मेन रोड गुरुद्वारा में शनिवार की रात में विशेष दीवान सजाए गए। कथावाचकों और रागियों ने शबद गाकर संदेश दिया कि मानुष की जात सभै पहिचानबो… अर्थात सभी मनुष्य एक ही जाति के हैं। उन्होंने सनातन धर्म की रक्षा के लिए उन्होंने अपने पूरे परिवार का बलिदान कर दिया, लेकिन डिगे नहीं। गुरु गोबिंद सिंह ने अपने अनुयायियों को जाति पंथ या लिंग के आधार पर सभी भेदभाव को अस्वीकार करने का पाठ पढ़ाया। कृष्णा नगर कॉलोनी गुरुद्वारा में स्त्री सत्संग सभा की बबली दुआ और इंदु पपनेजा द्वारा नासरो मंसूर गुरु गोबिंद सिंह एज दी मंजूर गुरु गोबिंद सिंह… शबद गायन कर की। दीवान में अमृतसर दरबार साहिब से शिरकत करने रांची पहुंचे रागी जलविंदर सिंह ने वाह प्रगट्या पुरख भगवंत रूप गुरु गोबिंद सुरा… तुम हो सब राजन के राजा, आपे आप गरीब नवाजा… शबद गाकर संगत को प्रभु चरणों से जोड़ा। गुरु घर के सेवक महेश सुखीजा ने अखंड पाठ की समाप्ति की। हेड ग्रंथी ज्ञानी जिवेन्द्र सिंह ने अनंद साहिब का पाठ किया। रात 9 बजे से संगत के बीच गुरु का अटूट लंगर चलाया गया। मेन रोड गुरुद्वारा में गुरु गोबिंद सिंह महाराज को श्रद्धा सुमन अर्पित उधर, मेन रोड गुरुद्वारा में श्री गुरु सिंह सभा द्वारा सजाए गए विशेष रात्रि दीवान की गुरुद्वारा के हजूरी रागी भाई भरपूर सिंह और उनके साथियों ने शबद गायन कर शुरुआत की। उनके बाद श्री गुरु सिंह सभा के हजूरी रागी भाई मनप्रीत सिंह और उनके साथियों ने शबद गायन कर संगत को निहाल किया। बच्चों दिवलीन कौर, अभिराज सिंह और मधुर और सुरीली आवाज में शबद गायन कर गुरु गोबिंद सिंह महाराज को श्रद्धा सुमन अर्पित किए। गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी विक्रम सिंह द्वारा हुकमनामा पढ़ने और अरदास करने के साथ रात्रि दीवान की समाप्ति हुई। दीवान का संचालन श्री गुरु सिंह सभा रांची के महासचिव गगनदीप सिंह सेठी ने किया।


