राजगढ़ शहर में बढ़ती स्ट्रीट डॉग की संख्या और रेबीज के खतरे को देखते हुए नगर पालिका ने नसबंदी अभियान शुरू किया है। कलेक्टर गिरीश मिश्रा के निर्देश पर चल रहे इस अभियान में स्ट्रीट डॉग को पकड़कर नसबंदी की जा रही है और ऑपरेशन के बाद उन्हें दूध-रोटी, उबले आलू, मीट-मटन, चावल और अंडा जैसी तय डाइट दी जा रही है। पहले चरण में 10 स्ट्रीट डॉग की नसबंदी पूरी की गई है। नगर पालिका सीएमओ पवन कुमार अवस्थी के नेतृत्व में गठित टीम शहर की सड़कों, गलियों और कॉलोनियों में घूम रहे स्ट्रीट डॉग को जाली की मदद से सुरक्षित पकड़ रही है। इसके बाद उन्हें पाटन रोड स्थित शासकीय भवन में बनाए गए अस्थायी ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। ऑपरेशन से पहले आराम और उपवास नसबंदी से पहले स्ट्रीट डॉग को पिंजरों में रखकर एक दिन पूरा आराम दिया गया, ताकि वे तनावमुक्त रहें। सर्जरी से एक दिन पहले उन्हें भूखा रखा गया, जिससे ऑपरेशन के दौरान कोई चिकित्सकीय परेशानी न हो। नसबंदी की प्रक्रिया पशु चिकित्सकों की विशेष टीम ने की। इसमें डॉ. रवि कुमार अरुण, डॉ. मधुसूदन शाक्य, डॉ. एम.एस. बामनिया, डॉ. रामबरन और डॉ. सुनील कुमार नागोरिया शामिल रहे। सभी स्ट्रीट डॉग की सर्जरी सावधानीपूर्वक की गई और ऑपरेशन के तुरंत बाद रेबीज का टीका लगाया गया। नसबंदी के बाद तीन दिन निगरानी और तय डाइट नसबंदी के बाद स्ट्रीट डॉग को तीन दिन तक अलग-अलग पिंजरों में विशेष निगरानी में रखा गया। उनके लिए तय डाइट चार्ट लागू किया गया। सुबह दूध और रोटी दी गई, इसके बाद उबले आलू खिलाए गए। दिन में मीट-मटन और रात में चावल व अंडा दिया गया। नगर पालिका और चिकित्सकीय टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर रख रही है। एक स्ट्रीट डॉग पर 2500 से 3000 रुपए खर्च सीएमओ पवन अवस्थी ने बताया कि एक स्ट्रीट डॉग की नसबंदी, दवाइयों, भोजन और चार दिन की देखरेख पर करीब 2500 से 3000 रुपये का खर्च आ रहा है। चार दिन की निगरानी पूरी होने के बाद स्ट्रीट डॉग को उसी स्थान पर छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। अगले चरण में 30 और स्ट्रीट डॉग की नसबंदी नगर पालिका अब अगले चरण में 30 और स्ट्रीट डॉग की नसबंदी की तैयारी कर रही है। प्रशासन का मानना है कि इससे शहर में स्ट्रीट डॉग की संख्या नियंत्रित होगी और रेबीज जैसी बीमारी का खतरा कम होगा।


