सोमवार को पुलिस प्रशिक्षण कॉलेज में बुनियादी प्रशिक्षण ले रहे 986 नवआरक्षकों को ट्रैफिक मैनेजमेंट की ट्रेनिंग दी गई। इसके लिए वर्कशॉप भी आयोजित की। ट्रैफिक मैनेजमेंट पुलिस की टीम ने प्रैक्टिकल के माध्यम से ट्रैफिक मैनेजमेंट से जुड़े विभिन्न पहलुओं जैसे इंजीनियरिंग, एजुकेशन, इंफोर्समेंट, इमरजेंसी केयर आदि के बारे में पूरी जानकारी साझा की। एसीपी संतोष कुमार कौल ने नवआरक्षकों को ट्रैफिक मैनेजमेंट के दौरान आने वाली चुनौतियों और संयम, समन्वय, संवाद और संवेदनशीलता के द्वारा उन चुनौतियों से किस तरह सामना किया जाए इसके बारे में जानकारी दी। वीआईपी ड्यूटी और अन्य इंतजामों में ट्रैफिक व्यवस्था करने के दौरान ध्यान देने वाली बातों को बताया। ट्रैफिक संचालन के तरीकों का डेमो
ट्रैफिक सूबेदार काजिम हुसैन रिजवी ने ट्रैफिक प्रवर्तन में उपयोग संसाधनों उपकरण जैसे लाइट बेटन, ब्रेथ एनालाइजर मशीन, चालान बनाने की पीओएस मशीन कार्यप्रणाली, बॉडी वार्न कैमरा का इस्तेमाल, ओवर स्पीड़ पर नियंत्रण के लिए इंटरसेप्टर वाहन का संचालन, आईटीएमएस सिस्टम, मोटरव्हीकल एक्ट प्रावधानों की जानकारी दी गई। ट्रैफिक एजुकेशन विंग के आरक्षक सुमंत सिंह ने ट्रैफिक हैंड साइन प्रैक्टिकल कर ट्रैफिक संचालन के तरीकों का डेमो दिया। साथ ही बताया कि किस तरह सिटी, हाथों के इशारे, चौकन्नी नजर, सुरक्षित ड्यूटी पोजिशन से ट्रैफिक नियंत्रित किया जा सकता है। ट्रैफिक अल्फाबेट्स और कम संसाधनों में बेहतर ट्रैफिक मैनेजमेंट के तरीके भी बताए। फील्ड से मिलेगा अनुभव
एसीपी (पीटीसी) गीता चौहान ने सड़क हादसों की गंभीरता से नवआरक्षकों को रूबरू करवाया व उन्हें नियमों का पालन करने व करवाने की हिदायत भी दी। उन्होंने बताया कि सभी प्रशिक्षणार्थी जल्द ही यातायात मैनेजमेंट पुलिस, इंदौर के साथ फील्ड में जाकर ट्रैफिक व्यवस्था संभालने में मदद और अनुभव भी प्राप्त करेंगे, ताकि जब ये प्रशिक्षण प्राप्त कर अपनी पोस्टिंग यूनिट जाए तो वहां भी बेहतर यातायात व्यवस्था करें। सभी ने ट्रैफिक मैनेजमेंट ट्रेनिंग में रुचि दिखाई और उन्होंने ने ट्रैफिक नियम एवं सड़क सुरक्षा के बारे में बहुत कुछ सीखा।


