कर्मचारी संगठन बोले-मंत्री और विभागाध्यक्ष नहीं करते बात:प्री बजट बैठक में सीएम भजनलाल ने कहा-कर्मचारी राज्य की महत्वपूर्ण कड़ी

भजनलाल सरकार का दूसरा बजट फरवरी में आएगा। इसके लिए वित्त विभाग ने पहले ऑनलाइन सुझाव मांगे। वहीं इसी कड़ी में आज सीएम भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के विभिन्न कर्मचारी संगठनों के साथ बैठक की। बैठक में कर्मचारी संघों ने प्रमुख रूप से वेतन विसंगतियों के निराकरण के लिए बनी खेमराज कमेटी की सिफारिशों को सार्वजनिक करने की मांग रखी। वहीं कर्मचारी संगठनों ने कहा कि बजट आने से पहले परम्परा के अनुसार सीएम कर्मचारी संगठनों से वार्ता करते है। लेकिन पूरे साल विभाग के मंत्री और विभागाध्यक्ष कर्मचारी संगठनों से बात तक नहीं करते हैं। कर्मचारी संगठनों ने एनपीएस में काटी गई लगभग 53 हजार करोड़ की राशि को जीपीएफ में जमा कराने, पदौन्नति के अवसरों की विसंगति को दूर करने सहित विभिन्न मांगों सीएम भजनलाल शर्मा के सामने रखी। बैठक में सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि कर्मचारी हमारे राज्य की महत्वपूर्ण कड़ी है तथा सरकार और कर्मचारी का संबंध प्रगाढ़ होता है। हमारी प्राथमिकता है कि कर्मचारियों को किसी भी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। प्रदेश स्तरीय वेतन आयोग का गठन हो
अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ एकीकृत के प्रदेश अध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ ने कहा कि वेतन विसंगतियों के निराकरण के लिये खेमराज चौधरी की अध्यक्षता में बनी वेतन विसंगति परीक्षण समिति की रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए। इसके साथ ही उन्होने 9,18,27 की जगह 8,16,24 और 32 वर्ष की सेवा अवधि पूर्ण करने पर पदौन्नति देने की मांग रखी। वहीं अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदेश महावीर शर्मा ने कहा कि दक्षिण भारत के राज्य केरल, कर्नाटक, तेलंगाना आदि की तरह राजस्थान में भी प्रदेश स्तरीय वेतन आयोग का गठन करक प्रत्येक 5 वर्ष पर राज्य के कर्मचारियों के वेतनमानों की समीक्षा कर उनमें महंगाई दर के अनुपात में वृद्धि की जावे। शिक्षा विभाग में 5 साल से नहीं हुए प्रमोशन
राजस्थान प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विपिन प्रकाश शर्मा ने शिक्षकों की डिमांड रखते हुए कहा कि शिक्षा विभाग में 5 सालो से डीपीसी और पदोन्नति लंबित चल रही है। पदोन्नति पाना शिक्षकों का अधिकार है। लेकिन शिक्षक बिना पदोन्नति के ही रिटायर हो रहे है। वही दिव्यांगों बच्चों को पढ़ने के लिए विशेष शिक्षक उपलब्ध नहीं है। सरकार ने इन विशेष बच्चों को पढ़ाने के लिए व्याख्याता विशेष शिक्षा के नियम तो बना दिए। लेकिन विशेष शिक्षक नहीं लगाए। प्री बजट बैठक में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों का मुद्दा भी उठा। शिक्षक संघो ने मांग रखते हुए कहा कि सरकार को जल्द तबादला पॉलिसी लानी चाहिए।

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