छत्तीसगढ़ कर्मचारी-अधिकारी फेडरेशन ने अपनी 11 सूत्रीय लंबित मांगों के समर्थन में 29 दिसंबर से तीन दिवसीय प्रदेशव्यापी हड़ताल शुरू कर दी है। इस ‘काम बंद-कलम बंद’ आंदोलन के कारण जिले से लेकर ब्लॉक स्तर तक के शासकीय कार्यालयों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ। फेडरेशन का कहना है कि महंगाई भत्ता, वेतन विसंगति, नियमितीकरण, पेंशन और सेवा शर्तों से जुड़ी कई मांगें वर्षों से लंबित हैं। सरकार लंबे समय से कर्मचारियों की जायज मांगों की अनदेखी कर रही है, जिससे उनमें गहरा असंतोष है। सरकार के खिलाफ नारेबाजी की खैरागढ़ में जिला संयोजक प्रखर शरण सिंह के नेतृत्व में अधिकारी-कर्मचारी अंबेडकर चौक पर एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान “अब नई सहिबो, अपन हक लेके रहीबो” और “मोदी की गारंटी पूरी करो” जैसे नारे लगाए गए। हड़ताल का असर शिक्षा व्यवस्था पर भी शीतकालीन अवकाश के बाद स्कूल पहुंचे बच्चों को शिक्षकों और कर्मचारियों की अनुपस्थिति के कारण वापस लौटना पड़ा। कई विभागों में कामकाज पूरी तरह ठप रहा। फेडरेशन की ओर से मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मुख्य सचिव के नाम ज्ञापन सौंपकर 11 सूत्रीय मांगों के त्वरित निराकरण की मांग की गई है। कर्मचारियों की प्रमुख मांग इन प्रमुख मांगों में देय तिथि से महंगाई भत्ता व एरियर्स भुगतान, पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करना, समयमान वेतनमान, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, अनुकंपा नियुक्ति, सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करना, तथा दैनिक वेतनभोगी व संविदा कर्मचारियों का नियमितीकरण शामिल हैं। फेडरेशन ने चेतावनी दी है कि यदि 31 दिसंबर तक सरकार ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को और तेज करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।


