बैकुंठ एकादशी पर भगवान अपने भक्तों से मिलने आते हैं : अनिरुद्ध आचार्य

श्रीलक्ष्मी वेंकटेश्वर तिरुपति बालाजी मंदिर में चार दिवसीय श्री बैकुंठ उत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को बैकंुठ एकादशी का आयोजन किया गया। सैकड़ों श्रद्धालुओं ने बैकुंठ एकादशी का व्रत रखा और मंदिर पहुंचकर भगवान को पूजा-अर्चना के बाद मत्था टेका। महोत्सव के दूसरे दिन सहस्त्रनाम अर्चना अनुष्ठान में भी मौजूद काफी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। रांची में रह रहे तमिलनाडु, तेलांगना, आंध्रप्रदेश और कर्नाटक के लोग भी काफी संख्या में मंदिर में सहस्त्रनाम अर्चना अनुष्ठान में शामिल हुए। मंगलवार को चार पालियों के सहस्त्रार्चन में 150 परिवारों ने सहभागिता निभाई। श्रीधाम वृंदावन से आए जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्रीस्वामी अनिरुद्धाचार्य महाराज और उनके सहयोगी श्रीगोविंद दास महाराज के हाथों संकल्प कराकर पूजन किया। बैकुंठ एकादशी के उपलक्ष्य पर भगवान का महाभिषेक हुआ। अभिषेक के यजमान सुनील केजरीवाल धर्मप|ी सुमन केजरीवाल हुए। सहस्त्रनाम अर्चना में राम अवतार नारसरिया, अनूप अग्रवाल, घनश्याम दास शर्मा, उदय राठौर, सुरेश प्रसाद सिंह, श्याम किशोर मिश्रा, गौरीशंकर साबू, आयुष अग्रवाल, कमलनयन द्विवेदी, अनीश अग्रवाल के अलावा सैकड़ों लोगों ने परिवार सहित यजमान की भूमिका निभाई। जगद्गुरु रामानुजाचार्य श्रीस्वामी अनिरुद्ध आचार्य ने कहा कि बैकुंठ एकादशी धनुर्मास मास के दौरान शुक्ल पक्ष की एकादशी को होती है। माना जाता है कि बैकुंठ लोक का द्वार इस दिन खुलता है। इस दिन भगवान अपने आलवारों और भक्तों से मिलने आते हैं। सभी आलवार भगवान का मंगलानुशासन और मंगल कामना करते हैं। आलवार संत भगवान का गुणगान करते हैं तो भगवान बहुत प्रसन्न होते हैं। भगवान के नाम, रूप, लीला- धाम का गुणगान कर संसार के लोगों का कल्याण होता है।

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