रिटायरमेंट से एक दिन पहले प्रभारी डीजीपी तदाशा मिश्रा को झारखंड सरकार ने स्थाई डीजीपी बना दिया। अब वे दो साल तक इस पद पर बनी रहेंगी। 1994 बैच की आईपीएस अफसर तदाशा झारखंड की पहली महिला डीजीपी हैं। उन्हें डीजीपी बनाने के लिए सरकार ने अपनी नियमावली में भी संशोधन किया है। पहले स्थाई डीजीपी के लिए सेवानिवृत्ति की तिथि से कम से कम छह माह पूर्व पोस्टिंग अनिवार्य थी। लेकिन सरकार ने एक दिन पहले सोमवार को महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक झारखंड (पुलिस बल प्रमुख) का चयन एवं नियुक्ति नियमावली 2025 को संशोधित किया। अब दो साल तक डीजीपी पद पर बनी रहेंगी सेवानिवृत्ति से 55 दिन पहले बनी थीं प्रभारी डीजीपी तदाशा मिश्रा 31 दिसंबर को रिटायर होने वाली थीं। सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले उन्हें प्रभारी डीजीपी बनाया गया था। राज्य सरकार ने 8 जनवरी 2025 को डीजीपी में प्रमोशन के लिए यूपीएससी को पैनल भेजने के बजाय एक नियमावली बनाई थी। इसमें हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाने का प्रावधान किया गया था। इसी कमेटी की अनुशंसा पर उन्हें डीजीपी बनाना तय हुआ। पूर्व डीजीपी अनुराग गुप्ता की नियमित पदस्थापन भी इसी नियमावली के तहत हुई थी। नियमावली में संशोधन पर कैबिनेट की मंजूरी की प्रत्याशा में मुख्यमंत्री की स्वीकृति ली गई सरकार ने नियमावली में संशोधन कर दिया। लेकिन संशोधित नियमावली पर कैबिनेट की मंजूरी की जगह कैबिनेट की मंजूरी की प्रत्याशा में सीएम की स्वीकृति ली गई। नया संकल्प जारी होने के बाद मंगलवार को हाईकोर्ट के एक रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में कमेटी की बैठक हुई। इसमे पूर्व डीजीपी नीरज सिन्हा और कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इस बैठक में तदाशा मिश्रा को नियमित डीजीपी बनाने का अनुशंसा की गई।


