भास्कर न्यूज | अमृतसर श्री दुर्ग्याणा तीर्थ स्थित वेद भवन में आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा आयोजित 8 दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा में भक्ति रस और ज्ञान रस की धारा 7वें दिन भी अविरल बही। साध्वी गुरमयी जी ने बताया कि मृत्यु तो अटल है परंतु इसे संवार सकते हैं। भगवान की स्मृति रहे और संसार की विस्मृति रहे तभी जीवन आनंदमय हो जाता है और मृत्यु संवर जाती है। संसार की विस्मृति का यह मतलब नहीं है कि सब भूल जाएंगे, जो जिस समय आवश्यक होगा वह स्वयं ही याद आ जाएगा, परंतु भगवान की स्मृति हर पल बनी रहेगी। भगवान का सामीप्य पाने के लिए गोपी होना पड़ेगा। गोपी का अर्थ है जो भीतर भक्ति रस और ज्ञान रस में डूबा है। आठ दिनों तक चले इस ज्ञान यज्ञ का औपचारिक समापन हो गया। आयोजन समिति के अनुसार, कल सुबह 9 बजे से 11:30 बजे तक वेद भवन में विशेष हवन का आयोजन किया जाएगा, जिसके पश्चात विधि-विधान के साथ पूर्णाहुति डाली जाएगी।


