लोगों के चोरी हुए मोबाइल पुलिस बरामद कर रही है। इन्हें उनके मालिकों को लौटाया भी जा रहा है, लेकिन पुलिस यह नहीं बता पा रही है कि वे किसके पास से बरामद हुए हैं। पिछले एक साल में रायपुर और बिलासपुर पुलिस ने ऐसे 1085 मोबाइल फोन बरामद कर लोगों को लौटाए। इनमें से राजधानी रायपुर में ही 765 फोन बरामद कर पीड़ितों को लौटाए गए हैं। हैरत की बात ये है कि इन मामलों में एक पर भी केस नहीं बना और न ही चोरों पर कार्रवाई हुई। आमतौर पर बाजार, ट्रेन, हाट से लोगों के मोबाइल फोन चोरी हो रहे हैं। पीड़ित रिपोर्ट दर्ज कराने थाने आते हैं तो पुलिस उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं करती। उनसे गुम होने का आवेदन ले लेती है। इसके बाद क्या होता है, इस बारे में केवल पुलिस ही जानती है। अचानक गुम हुए मोबाइल फोन मालिकों के पास फोन आता है, “आपका मोबाइल फोन मिल गया है” और तीन दिन बाद अधिकारी सामूहिक रूप से लौटाएंगे। पीड़ित जब वहां जाता है तो फोन भी दे दिया जाता है पर यह नहीं बताया जाता कि वह मोबाइल इतने दिनों तक किसके पास रहा। सीधे प्रार्थी को नहीं लौटा सकती पुलिस, कोर्ट में जमा करने का नियम चोरी होने पर एफआईआर होती है, फिर पुलिस जांच कर सामान बरामद करती है। इसके बाद बिल और पहचान पत्र के साथ कोर्ट में सुपुर्दनामे के लिए आवेदन करना होता है, फिर अदालत सामान सौंपती है। यह प्रक्रिया दस्तावेजों की जांच के बाद पूरी होती है। यदि पुलिस सीधे मोबाइल लौटा रही है तो प्रक्रिया गलत है। पीड़ित को मोबाइल मिल जाता है तो वह अधिक ध्यान नहीं देता, लेकिन ऐसे में चोर बच जाते हैं। वे फिर से वारदात करने लगते हैं। – विनय दुबे, हाईकोर्ट अधिवक्ता रायपुर में मोबाइल से जुड़ी 3000 शिकायतें: रायपुर में एक साल के भीतर 3000 से ज्यादा मोबाइल चोरी और गुम होने की शिकायतें दर्ज हुई हैं। 765 गुम फोन बरामद कर पुलिस ने पीड़ितों को लौटा दिए। पुलिस की ओर से बताया गया कि जिन लोगों से मोबाइल जब्त किए गए हैं, उनकी गिरफ्तारी नहीं की गई है। अधिकांश लोगों ने ये मोबाइल किसी न किसी से खरीदे थे। उनका चोरी में सीधा कनेक्शन या संलिप्तता नहीं पाई गई है। उन्हें यह जानकारी भी नहीं थी कि मोबाइल चोरी का है। किसी का मोबाइल ढूंढने के लिए आसान प्रक्रिया नहीं है। साइबर सेल यह काम किसी का मोबाइल ढूंढने के लिए निजी तौर पर नहीं कर सकती। पुलिस को यह बताना चाहिए कि उसने मोबाइल कहां-कहां से बरामद किया। नहीं बता रही है तो इसका मतलब साफ है कि मोबाइल चोरों से ही बरामद हो रहे हैं और उन्हें छोड़ा जा रहा है। मोबाइल लौटाने के बहाने पुलिस अपनी पीठ थपथपा रही है। – जयंत थोरात, रिटायर्ड आईपीएस


