मुनि श्री शिवदत्त सागर के आगमन से गुना हुआ धर्ममय

भास्कर संवाददाता | गुना कड़ाके की ठंड और ओस की बूंदों के बीच मंगलवार सुबह जैसे ही निर्यापक श्रमण मुनि श्री शिवदत्त सागर एवं मुनि श्री पद्मदत्त सागर महाराज ने गुना की पावन धरा पर चरण रखे, पूरा नगर धर्ममय वातावरण में डूब गया। जैन समाज सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उत्साह, श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मुनिराजों की अगवानी की। नगर में जयघोष और मंगल ध्वनि से आध्यात्मिक उल्लास छा गया। इस अवसर पर आयोजित धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री शिवदत्त सागर महाराज ने गुना वासियों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गुना के विषय में उन्होंने बहुत कुछ सुना था, लेकिन यहां आकर श्रद्धालुओं की भक्ति देखकर अनुभव हुआ कि यह नगरी अपने नाम को सार्थक करती है। “यथा नाम तथा गुण” का उदाहरण गुना में प्रत्यक्ष दिखाई देता है। मुनिश्री ने कहा कि यहां के श्रावक इतनी तन्मयता और लयबद्धता से पूजन करते हैं कि किसी बाहरी संगीत की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने बताया कि इसी अटूट श्रद्धा और साधना का परिणाम है कि इस पावन भूमि से अब तक तीन मुनिराज और आठ आर्यिका माताजी दीक्षित होकर मोक्ष मार्ग पर अग्रसर हुए हैं। मुनिश्री ने अपने उपदेशों में कहा कि सच्ची भक्ति केवल दर्शन और वंदन तक सीमित नहीं है, बल्कि साधु-संतों के उपदेशों को जीवन में उतारना ही वास्तविक साधना है। विषय-वासनाओं में लिप्त व्यक्ति पतन की ओर जाता है, जबकि धर्म और संयम का मार्ग मोक्ष की ओर ले जाता है। मुनिश्री ने आगामी कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए बताया कि उनके अग्रज, गुना गौरव मुनि श्री सुदत्त सागर महाराज आगामी 4 जनवरी को 11 पिच्छिका धारी संतों के साथ पहली बार गुना नगर में पदार्पण करेंगे। 31 दिसंबर को पदयात्रा और मंगल जुलूस से होगा ऐतिहासिक स्वागत मुनिश्री शिवदत्त सागर महाराज ने आगामी धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि 31 दिसंबर को गुना से बजरंगगढ़ तक विशाल पदयात्रा निकाली जाएगी। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सहभागी बनेंगे। सभी भक्त बजरंगगढ़ पहुंचकर आचार्य श्री निर्भय सागर महाराज की भव्य अगवानी करेंगे। नए वर्ष के प्रथम दिन भगवान शांतिनाथ के दर्शन -वंदन के पश्चात 4 जनवरी 2026 को दोपहर 2:30 बजे भव्य मंगल जुलूस के साथ मुनि संघ का गुना नगर में ऐतिहासिक प्रवेश होगा।

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