ग्वालियर के तानसेन रोड पर स्थित एक नेचुरोपैथी अस्पताल के सामने की जमीन को लेकर चल रहे 48 साल पुराने विवाद में हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा है कि लीज की अवधि खत्म होने के बाद किसी भी जमीन पर कब्जा रखना पूरी तरह गैरकानूनी है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि जब लीज खत्म हो जाती है, तो उसका अपने आप अंत हो जाता है। इसके बाद जमीन पर बने रहना अतिक्रमण माना जाएगा। कोर्ट ने निचली अदालतों के फैसले को सही मानते हुए अपीलकर्ताओं की दूसरी अपील खारिज कर दी। इसके साथ ही नगर निगम ग्वालियर को जमीन पर कानून के अनुसार कार्रवाई करने की पूरी छूट दे दी गई है। 3161.6 वर्गफुट खुली जमीन का है मामला यह विवाद तानसेन रोड स्थित नेचुरोपैथी अस्पताल के सामने 3161.6 वर्गफुट खुली जमीन को लेकर था। इस मामले में डॉ. मणिकांत शर्मा के वारिसों ने नगर निगम ग्वालियर के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की थी। उनका कहना था कि यह जमीन पहले उनके पिता को लीज पर दी गई थी और बाद में इसका नवीनीकरण भी हुआ था। सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि यह लीज केवल 31 मार्च 1977 तक ही वैध थी। अपीलकर्ता यह साबित नहीं कर पाए कि इसके बाद लीज का कोई वैध नवीनीकरण हुआ हो। अपीलकर्ताओं के वकील ने भी कोर्ट में माना कि लीज बढ़ाने से जुड़े कोई दस्तावेज मौजूद नहीं हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर मान लिया जाए कि 1976 में लीज को 30 साल के लिए बढ़ाया गया था, तो भी वह 2007 में ही खत्म हो जाती। इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि बिना वैध लीज के जमीन पर कब्जा रखना कानूनन गलत है, और नगर निगम अब उस जमीन पर कार्रवाई कर सकता है।


