गायब पावन स्वरूपों के प्रकरण में जत्थेदार गड़गज्ज की भूमिका अनुचित, पूर्व अधिकारियों को बचाने का प्रयास

भास्कर न्यूज | अमृतसर श्री गुरु ग्रंथ साहिब के 38 गायब पावन स्वरूपों का विवाद गहरा गया है। इसे लेकर हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी, दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी ने साफ किया कि यह सिर्फ धार्मिक मामला नहीं है, यह समूचे सिख कौम से जुड़ा हुआ श्री गुरु ग्रंथ साहिब के अपमान का मामला है। दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की धर्म प्रचार कमेटी के प्रधान मनजीत सिंह भोमा, भाई मोहकम सिंह, सतनाम सिंह तथा अन्यों ने तो श्री अकालतख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज की नियुक्ति पर ही सवाल उठाते हुए उन्हें मान्यता तक देने से इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि जत्थेदार गड़गज्ज को स्वयं इसका संज्ञान लेते हुए आरोपी पूर्व अधिकारियों को कटघरे में खड़ा करना चाहिए। सिख समुदाय को विश्वास में लेते हुए एसजीपीसी से नए सिरे से दोबारा रिकार्ड तलब कर जांच कर दोषियों को सजा देनी चाहिए। समस्त सच्चाई व रिकार्ड सिख समुदाय के समक्ष रखना चाहिए ताकि पंथ की संतुष्टि हो सके। सिंह साहिबान इस मामले में पंथ की संतुष्टि नहीं करवा सके हैं। उनके द्वारा भी एसजीपीसी से मिलकर चोरों को (आरोपी) बचाने का प्रयास किया जा रहा है। श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार अगर पहले ही इसकी सच्चाई उजागर कर देते, इसके लिए संघषरत भाई बलदेव सिंह वडाला को विश्वास में लेकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते तो संभवता आज भाई बलदेव सिंह को केस दर्ज करवाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। इसी बीच हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रधान जगदीश सिंह झींडा ने भी मंगलवार की शाम श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज से गायब स्वरूपों के मामले की नए सिरे से जांच करवाने की अपील की। उन्होंने कहा कि श्री गुरु ग्रंथ साहिब की साल 2015 में हुई बेअदबी के मामलों की भी निष्पक्ष जांच करवाई जानी चाहिए। उन्होंने खुलासा किया कि बेअदबी के मामले में न्याय के लिए पिछले 14 महीनों से गुरजीत सिंह खालसा टावर पर बैठे हैं। उनकी हालत नाजुक बनी हुई है। उन्होंने जत्थेदार गड़गज्ज से गुरदीप सिंह को अनशन छोड़ने की हिदायत देने की भी अपील की है। भाई मोहकम सिंह व भोमा ने कहा कि एसजीपीसी प्रधान हरजिंदर सिंह धामी एवं अकाली सुप्रीमो सुखबीर बादल द्वारा जांच को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसा सिर्फ दोषियों को बचाने के लिए नहीं बल्कि जांच की आंच सुखबीर बादल के घर तक न पहुंच पाएं। जांच सुखबीर के घर तक न पहुंच सके इसके लिए अनथक प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि धामी का यह कहना उचित नहीं है कि पंजाब पुलिस ने जांच के बिना ही केस दर्ज किया है। जांच के बिना भी पहले एफआरआई ही दर्ज की जाती है फिर ही किसी अपराधिक मामले की जांच होती है। न ही यह मामला पंजाब सरकार की दखलअंदाजी का है। आखिरकार सिख कौम व जनता को भी जानने का हक है कि जागत जोत पिता श्री गुरु ग्रंथ साहिब के पावन स्वरूप कैसे गायब हुए।

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