पीढ़ियों तक पुण्य देने वाला व्रत: पं. तिवारी

भास्कर न्यूज | बलौदाबाजार भगवान विष्णु को प्रिय एकादशी व्रत का सनातन परंपरा में विशेष महत्व है। हिन्दू पंचांग के अनुसार साल भर में कुल 24 एकादशी व्रत होते हैं, जिनका निर्धारण चंद्र तिथि के आधार पर किया जाता है। हालांकि नियमित रूप से व्रत रखने वाले श्रद्धालु अब अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार भी एकादशी तिथियों का कैलेंडर पहले से तैयार कर लेते हैं, ताकि तिथि और तारीख को लेकर किसी प्रकार का भ्रम न रहे। इसी क्रम में उदया तिथि के अनुसार नए वर्ष 2026 की पहली एकादशी 14 जनवरी को मकर संक्रांति के पावन पर्व के साथ पड़ेगी, जिसे महा-पुण्यशाली माना गया है। शहर के प्रमुख मंदिरों में एकादशी को लेकर विशेष धार्मिक गतिविधियां होंगी। बजरंग चौक स्थित महावीर हनुमान मंदिर में शाम के समय भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। वहीं राम मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। षष्ठी मंदिर, मौवली मंदिर, महामाया मंदिर सहित शहर और आसपास के अन्य मंदिरों में भी एकादशी पर धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। साल की विदाई और नए साल के स्वागत के अवसर पर कई मंदिरों में विशेष अनुष्ठान और भक्ति कार्यक्रमों की तैयारी की जा रही है। धार्मिक तिथियों के साथ-साथ विवाह मुहूर्त को लेकर भी लोगों में खास रुचि रहती है। इन दिनों विवाह मुहूर्त न होने के कारण शादी समारोहों में लंबा ब्रेक चल रहा है। वर्ष 2026 के जनवरी माह में एक भी विवाह मुहूर्त नहीं है। पंडितों के अनुसार इसका कारण शुक्र ग्रह का अस्त होना है। पंडित पृथ्वी पॉल ने बताया कि शुक्र ग्रह 3 फरवरी तक अस्त रहेगा, जिसके चलते जनवरी माह में विवाह का कोई भी शुभ मुहूर्त नहीं बन रहा है। शुक्र के उदित होते ही 4 फरवरी से विवाह मुहूर्त प्रारंभ हो जाएंगे। फरवरी से जुलाई 2026 के बीच कुल 63 दिन विवाह के लिए शुभ माने गए हैं, जबकि नवंबर और दिसंबर में केवल 18 दिन ही विवाह मुहूर्त उपलब्ध रहेंगे। इस लंबे अंतराल का लाभ वे परिवार उठा रहे हैं, जिनके यहां फरवरी से जुलाई के बीच विवाह प्रस्तावित हैं। विवाह मुहूर्त न होने से बाजारों में अपेक्षाकृत भीड़ कम है, जिससे लोग शांति से अपनी पसंद के अनुसार खरीदारी कर पा रहे हैं। इस अवधि को लोग ‘शॉपिंग फ्रेंडली पीरियड’ मानते हुए ज्वेलरी, कपड़े, सजावट, कैटरिंग और अन्य आवश्यक सामग्री की खरीदारी आराम से कर रहे हैं। पंडित पुनेश्वर प्रसाद तिवारी के अनुसार एकादशी व्रत का महत्व केवल उपवास तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मिक शुद्धि और मानसिक शांति का भी माध्यम है। उनका कहना है कि सभी सनातनियों को इस व्रत का पालन करना चाहिए। भगवान विष्णु की आराधना करने वाले भक्तों के लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना गया है। वर्तमान समय में यह सुखद संकेत है कि युवा पीढ़ी भी सनातन संस्कारों, परंपराओं और व्रतों से जुड़ रही है। आधुनिक और भागदौड़ भरे जीवन में एकादशी व्रत तनाव और चिंता को दूर करने में सहायक होता है।

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