आंखों में मामूली खुजली को हल्के में लेना और बिना डॉक्टर की सलाह मेडिकल स्टोर से आई ड्रॉप खरीदना कितना खतरनाक हो सकता है, इसका गंभीर उदाहरण भोपाल की 15 वर्षीय बच्ची का मामला है। स्टेरॉइड-बेस्ड गलत आई ड्रॉप के इस्तेमाल से बच्ची की आंख का कॉर्निया जल गया और देखने की क्षमता लगभग खत्म हो गई। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कॉर्निया फटने की कगार पर पहुंच गया। समय रहते गांधी मेडिकल कॉलेज और हमीदिया अस्पताल के डॉक्टरों ने दान में मिली कॉर्निया से ट्रांसप्लांट कर बच्ची की आंख की रोशनी बचा ली। यह मामला इसलिए भी खास है, क्योंकि बीते 7 दिनों में जीएमसी में 6 नेत्रदान हुए और 5 मरीजों का सफल कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया गया। यह उपलब्धि मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहली बार दर्ज हुई है। आंख में खुजली हुई तो खरीदी थी आई ड्रॉप कॉर्निया स्पेशलिस्ट डॉ. भारती आहूजा के अनुसार, छह महीने पहले बच्ची को आंखों में खुजली हुई थी। डॉक्टर को दिखाने के बजाय परिवार ने मेडिकल स्टोर से तेज स्टेरॉइड ड्रॉप ले ली। शुरुआती आराम के बाद कॉर्निया में अल्सर बनने लगा और धीरे-धीरे कॉर्निया गलने लगी। सौभाग्य से आंख का केंद्रीय हिस्सा सुरक्षित रहा और दान की कॉर्निया से प्रभावित भाग बदला गया। खुद दवा बनी रोशनी जाने की वजह : इसी तरह 30 वर्षीय राहुल ने आंख लाल होने पर खुद से तेज ड्रॉप डाल ली। नतीजतन कॉर्निया का निचला हिस्सा गल गया और दृष्टि चली गई। ट्रांसप्लांट के बाद अब उसकी रोशनी धीरे-धीरे लौट रही है।


