बालाघाट में नववर्ष का स्वागत बड़े ही धार्मिक उत्साह और उमंग के साथ किया गया। इस मौके पर शहर में पिछले 28 वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार 1111 फीट लंबी चुनरी यात्रा निकाली गई, जो पूरे नगर में मुख्य आकर्षण का केंद्र रही। श्रद्धालुओं ने कालीपाठ मंदिर, हनुमान मंदिर और शंकर मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना कर नए साल में सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। बब्बर सेना की देखरेख में निकाली गई चुनरी यात्रा दोपहर 1 बजे कोसमी स्थित मरकट बाबा अर्धनारीश्वर मंदिर से शुरू हुई। लगभग 5 किलोमीटर का सफर तय करते हुए यह यात्रा गोंदिया रोड, सरेखा, हनुमान चौक, सुभाष चौक और काली पुतली चौक जैसे प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। यात्रा में शामिल बड़ी संख्या में सनातन धर्मावलंबी मां के जयकारे लगाते हुए चल रहे थे। माता रानी को चुनरी भेंट और भंडारे का आयोजन यात्रा का समापन कालीपाठ मंदिर में हुआ, जहां मातारानी को 1111 फीट लंबी चुनरी पूरी श्रद्धा के साथ भेंट की गई। इस अवसर पर बब्बर सेना प्रमुख हितेश माहुले और जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि मुकेश माहुले सहित कई लोग मौजूद रहे। चुनरी भेंट करने के बाद मंदिर परिसर में भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें भक्तों ने प्रसादी ग्रहण की। पर्यटन स्थलों पर भी दिखा जश्न का माहौल धार्मिक कार्यक्रमों के साथ-साथ जिले के पर्यटन स्थलों पर भी लोगों की भारी भीड़ उमड़ी। वनस्पति उद्यान, वैनगंगा नदी घाट, गांगुलपारा और रमरमा जैसे पिकनिक स्पॉट्स पर लोगों ने परिवार के साथ वक्त बिताया। जिला पंचायत प्रतिनिधि मुकेश माहुले ने बताया कि हर साल नए साल के पहले दिन मां कालीपाठ को चुनरी भेंट करने की परंपरा है, जिसका मुख्य उद्देश्य जिले की खुशहाली और शांति बनाए रखना है।


