‘जी राम जी’ से राज्यों को ₹17,000 करोड़ फायदा होगा:SBI का दावा- यूपी, बिहार और महाराष्ट्र को ज्यादा फायदा

ग्रामीण इलाकों में रोजगार की गारंटी देने वाले नए कानून ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन’ (VB-G RAM G) से राज्यों की आर्थिक स्थिति और मजबूत होगी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक, फंडिंग पैटर्न में बदलाव के बावजूद राज्यों को सामूहिक रूप से करीब 17,000 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ होने की उम्मीद है। नए कानून से ज्यादा काम मिलेगा सरकार ने कहा कि नए कानून में हर ग्रामीण परिवार को अब साल में 125 दिन काम देने की गारंटी होगी, जो पहले 100 दिन थी। इससे गांवों में रहने वाले परिवारों को ज्यादा काम मिलेगा और उनकी आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी। कानून की धारा 22 के तहत इस योजना के खर्च को केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर वहन करेंगी। सामान्य राज्यों में खर्च का बंटवारा 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य के बीच होगा। वहीं, पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों- जैसे उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में केंद्र सरकार 90 प्रतिशत खर्च उठाएगी। धारा 6 के अनुसार, राज्य सरकारें खेती के व्यस्त समय, जैसे बुवाई और कटाई के दौरान, साल में अधिकतम 60 दिनों तक इस योजना के तहत मिलने वाले काम को नियंत्रित कर सकेंगी। मनरेगा के तहत ग्रामीण अनस्किल्ड लोगों को 100 के लिए रोजगार की गारंटी मिलती थी, यहां मनरेगा के बारे में भी जान लें… 60:40 फंडिंग रेश्यो से राज्यों पर बोझ नहीं बढ़ेगा इस कानून को लेकर सबसे बड़ी बहस इसके फंडिंग स्ट्रक्चर पर थी। नए नियमों के मुताबिक, केंद्र और राज्यों के बीच फंड का बंटवारा 60:40 के अनुपात में होगा। हालांकि, पूर्वोत्तर राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और हिमालयी राज्यों के लिए यह नियम अलग होगा। SBI की रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ लोग इसे राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ मान रहे हैं, लेकिन डेटा बताता है कि असल में राज्यों को इससे फायदा ही होगा। यूपी, महाराष्ट्र और बिहार को सबसे ज्यादा फायदा SBI ने पिछले 7 सालों (FY19-FY25) के मनरेगा आवंटन के साथ नए सिस्टम की तुलना की है। रिपोर्ट के मुताबिक: राज्यों को नहीं लेना पड़ेगा कर्ज रिपोर्ट में उन दावों को खारिज किया गया है जिनमें कहा जा रहा था कि 60:40 के रेश्यो से राज्यों को ज्यादा कर्ज लेना पड़ेगा। SBI के अनुसार, यह डर राज्यों की वित्तीय स्थिति की गलत समझ के कारण है। नए ढांचे में फंड का वितरण ‘इक्विटी और एफिशिएंसी’ यानी समानता और कार्यक्षमता के आधार पर होगा, जिससे विकसित और पिछड़े, दोनों तरह के राज्यों को बेहतर फंड मिल सकेगा। राज्यों के पास अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका SBI की रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि राज्य सरकारें अपनी ओर से 40% योगदान को प्रभावी ढंग से इस्तेमाल करके इस मिशन के रिजल्ट को और बेहतर बना सकती हैं। इससे न केवल रोजगार बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास भी तेजी से होगा। ———————- ये खबर भी पढ़ें… ‘जी राम जी’ बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी:चिदंबरम बोले- मनरेगा से गांधी का नाम हटाना उनकी दोबारा हत्या जैसा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज रविवार को विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) गारंटी बिल, 2025 (VB-G-RAM-G) को मंजूरी दे दी। अब यह कानून बन गया है। नया कानून 20 साल पुराने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) की जगह लेगा। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…

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