रोज 20-30 बच्चे गंभीर सांस-छाती की समस्या के साथ आ रहे ओपीडी

लुधियाना| शहर के सात वर्ष आठ माह के होनहार सचियार सिंह ओबरॉय ने अपनी मेहनत, संतुलन और एकाग्रता के दम पर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में स्थान हासिल कर शहर का नाम रोशन किया है। सचियार ने हुला-हूप में अद्भुत कौशल दिखाते हुए एंटी-क्लॉकवाइज दिशा में हुला-हूप घुमाते हुए 63 सीढ़ियां चढ़कर यह अनोखा कीर्तिमान बनाया। यह उपलब्धि न सिर्फ उनकी शारीरिक क्षमता, बल्कि मानसिक फोकस और अनुशासन का भी प्रमाण है। इस रिकॉर्ड की आधिकारिक पुष्टि 27 नवंबर 2025 को इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा की गई। इसके बाद 1 जनवरी को आयोजित सम्मान समारोह में साचियार को मेडल और किट प्रदान कर सम्मानित किया गया। समारोह में मौजूद लोगों ने इतने कम उम्र में इस तरह की चुनौतीपूर्ण उपलब्धि पर साचियार की जमकर सराहना की। परिजनों के अनुसार, सचियार को हुला-हूप में रुचि पिछले साल समर ब्रेक के दौरान एक म्यूजिक वीडियो देखने के बाद हुई। वीडियो से प्रेरित होकर उन्होंने खुद ही अभ्यास शुरू कर दिया। शुरुआत में यह महज एक खेल था, लेकिन निरंतर अभ्यास और रुचि के चलते यह जुनून बन गया। नवंबर 27 को उन्होंने यह रिकॉर्ड पूरा कर सबको चौंका दिया। उनके माता-पिता सुखअमृत ओबरॉय और अशमीत ओबरॉय ने बताया कि सचियार की सफलता के पीछे उसकी नियमित प्रैक्टिस और अनुशासन है, जिसमें परिवार ने हमेशा उसका साथ दिया। सचियार के दादा कवलजीत सिंह ने भी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि उनका पोता एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी अपना नाम दर्ज कराए। शहर के बच्चों में बढ़े सर्दी-जुकाम और कोल्ड कंजेशन के केस, पेरेंट्स बरतें खास सावधानी हुला-हूप में संतुलन और धैर्य की मिसाल केस 1: नवजात बच्ची को एडमिट करना पड़ा : दो महीने की बच्ची को तेज सांस और छाती जुड़ने की वजह से भर्ती किया गया : दो महीने की बच्ची अचानक तेज सांस और छाती जुड़ी होने की शिकायत के चलते सिविल अस्पताल में भर्ती हुई। डॉक्टरों ने बच्चे की हालत को गंभीर मानते हुए नेबुलाइज और ऑक्सीजन के जरिए देखभाल की। तीन दिन की निगरानी के बाद बच्ची पूरी तरह स्वस्थ हुई और माता-पिता के साथ घर भेजी गई। केस 2: एक साल के बच्चे को नेबुलाइज और ऑक्सीजन से मिला आराम:एक साल के बच्चे को तेज सर्दी और खांसी की शिकायत हुई। सांस में झड़झड़ाहट और छाती में खरखराहट थी। अस्पताल में नेबुलाइज और ऑक्सीजन दी गई। 2-3 दिन की देखभाल के बाद बच्चे की हालत सुधरी। केस 3: 8 महीने के बच्चे को तेज सर्दी और खांसी :8 महीने के बच्चे को तेज सर्दी और लगातार खांसी की शिकायत के साथ लाया गया। सांस में भी दिक्कत हो रही थी। डॉक्टरों ने हल्की देखभाल और नेबुलाइज से उसकी स्थिति पर निगरानी रखी। 2-3 दिनों में बच्चे की तबियत में सुधार होने लगा। डॉ. राजिंदर गुलाटी, पीडियाट्रिक डॉ. सुमिता सहदेव, पीडियाट्रिक, सिविल

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