44 छात्र, एक प्रोग्राम से हुआ था शुरू ,आज सात प्रोग्राम, 65 फैकल्टी व 1128 स्टूडेंट्स

आईआईएम रांची का 16वां स्थापना दिवस रविवार को मनाया जाएगा। पिछले एक साल में आईआईएम रांची में कई शैक्षणिक निर्णय लिए गए। वहीं कई उपलब्धियां भी प्राप्त हुई। इस साल के नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) 2024 रैंकिंग में आईआईएम रांची को 17वां रैंक प्राप्त हुआ है, जबकि पिछले साल 24वां रैंक प्राप्त हुआ था। इसके साथ ही छात्रों के लिए मल्टीडिसिप्लिनरी कोर्स शुरू किए गए हैं। संस्थान के डायरेक्टर दीपक कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि संस्थान में टीचिंग टेक्निक में भी नई पहल की गई है। जिसके तहत प्रॉब्लम सॉल्विंग केंद्रित शिक्षा की शुरुआत की गई है। जिसमें विषयों के साथ समस्या सुधार को केंद्र में रख कर छात्रों को पढ़ाया जा रहा है। बता दें आईआईएम रांची के अस्थाई कैंपस की नींव 15 दिसंबर 2009 में सूचना भवन में रखी गई। वहीं क्लास की शुरूआत 5 जुलाई 2010 से शुरू हुई। इसके साथ ही कांके रोड में सेटेलाइट ऑफिस और खेलगांव में हॉस्टल की व्यवस्था की गई। जब आईआईएम रांची की शुरूआत हुई तो इसकी मेंटरशिप आईआईएम कोलकाता द्वारा की जाती थी। वहां के प्रोफेसर आकर छात्रों को पढ़ाते थे। तब एक प्रोग्राम में 44 स्टूडेंट्स पढ़ाई करते थे। अब संस्थान का स्थाई कैंपस है। जहां वर्तमान में 7 प्रोग्राम में 1128 स्टूडेंट्स पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं 65 फैकल्टी अपनी सेवा दे रहे हैं। आईआईएम रांची से जुड़े तथ्य .इस साल आईआईएम रांची को 17वीं रैंक प्राप्त हुई है, जबकि पिछले साल 24वीं रैंक मिली थी। .सेकेंड जेनरेशन आईआईएम में सबसे ज्यादा फैकल्टी आईआईएम रांची में है। .अब तक एमबीए के 13 बैच और एमबीए एचआरएम के 11 बैच पासआउट हुए। . सत्र 2022-24 तक एमबीए,एमबीए-एचआरएम, एमबीए बीए में कुल 2912 स्टूडेंट्स पासआउट हुए। .आईआईएम रांची का नया कैंपस 60 एकड़ में फैला हुआ है। जो 280 करोड़ रुपए की लागत से बना है।

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