भास्कर न्यूज | अमृतसर16 दिसंबर से खरमास माह शुरू हो रहा है। खरमास माह के एक महीने के दौरान शादी-विवाह समेत अन्य मांगलिक कार्य नहीं होंगे। जबकि खरमास माह का समापन अगले वर्ष 14 जनवरी को होगा। आचार्य पंडित सोहन लाल शास्त्री के मुताबिक खरमास पर धनु की संक्रांति सूर्य मूल नक्षत्र सुबह 7:35 बजे से प्रतिपदा 1:12 बजे और आद्रा 2:43 बजे से शुरू हो रहा है। जबकि 14 जनवरी प्रतिपदा 3:19 बजे रात्रि, पुनर्वास नक्षत्र 10:27 बजे सुबह में मकर संक्रांति के दौरान खिचड़ी का भोग लगने के उपरांत सूर्य उत्तरायण हो जाएगा। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश होने के साथ ही खरमास समाप्त हो जाएगी। उसके बाद शिशिर ऋतु यानि बसंत ऋतु का आरंभ हो जाएगा। उन्होंने बताया कि खरमास में पूजा-पाठ, भजन-कीर्तन और भगवान विष्णु की आराधना का विशेष महत्व होता है। वहां खरमास में शादी विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश समेत अन्य मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाएगी। खरमास में भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में सुख शांति बनी रहती है।


