जीवाजी विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक नई पहल की है। विश्वविद्यालय परिसर को प्रदूषण मुक्त बनाने के उद्देश्य से अब हर महीने की 2 और 16 तारीख को ‘नो व्हीकल डे’ मनाया जाएगा। शुक्रवार को इस पहल के तहत पहला ‘नो व्हीकल डे’ आयोजित किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय परिसर में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहा। ‘नो व्हीकल डे’ के कारण विश्वविद्यालय के सभी प्रमुख गेटों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। सुरक्षा गार्डों ने वाहन चालकों को गेट पर ही रोककर वाहनों को बाहर पार्क करने के निर्देश दिए। इसके बाद छात्रों, शिक्षकों, कर्मचारियों और आगंतुकों को परिसर में पैदल या साइकिल से ही प्रवेश दिया गया। शुरुआत में कुछ लोगों को जानकारी का अभाव था, लेकिन प्रशासनिक कर्मचारियों द्वारा सूचित किए जाने के बाद सभी ने नियमों का पालन किया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी महीने की 2 या 16 तारीख को अवकाश होता है, तो ‘नो व्हीकल डे’ की तारीख बदल दी जाएगी। ऐसी स्थिति में 2 तारीख के स्थान पर 3 तारीख और 16 तारीख के स्थान पर 17 तारीख को ‘नो व्हीकल डे’ रहेगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यह पहल हर माह दो कार्यदिवसों में प्रभावी रूप से लागू हो सके। प्रशासन के अनुसार, विश्वविद्यालय परिसर में बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही के कारण वायु और ध्वनि प्रदूषण लगातार बढ़ रहा था, जिसका छात्रों और कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा था। ‘नो व्हीकल डे’ लागू होने से न केवल प्रदूषण में कमी आएगी, बल्कि परिसर में शांति और स्वच्छ वातावरण भी बना रहेगा। पहले ही दिन परिसर में अपेक्षाकृत शांत और साफ माहौल देखा गया। इस निर्णय का छात्रों और शिक्षकों ने स्वागत किया है। छात्रों का कहना है कि यह कदम पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली को भी प्रोत्साहित करेगा। वहीं, शिक्षकों ने इसे अनुशासन, जिम्मेदारी और हरित परिसर की दिशा में एक सकारात्मक पहल बताया है।


