खेल ने ही तोड़ दिया दम:जयपाल ने जिस टकरा गांव से हॉकी की शुरुआत की, वहां फंड मिलने के बाद भी नहीं बनी स्पोर्ट्स अकादमी

वर्ष 19211 के ऑलिंधिक में भारत को लेकी में पहला गोल्ड मेडल मिला था। तब टीम के कप्तान से खूंटी के टकरा गांव के पढ़ान टोली निवासी करपल सिंह गुंडा। उन्हें झारखंड उनहें मांग गोमके (सबसे बड़े नेता) के नाम से जानता है। उन्होंने ही सबसे पहले संसद में झारखंड शब्द का उल्लेख किया छ। सरखंड पार्टी बनाकर यहां की राजनीति को नया मुकाम दिया। लेकिन जयपाल सिंह के गांव में आज हॉकी की स्थिति ठीक नहीं है। जिस मैदान से उन्होंने हॉकी की शुरूआत की थी, वह मैदान उपेक्षित पड़ा है। टूटे-फूटे की मैदान में फुटचॉल का गोल पोस्ट लगा है। जिन्होंने बैंकों को गढ़ा और देश-दुनिया में सम्मान दिलाया, उनके गांव में नयशाल सिंह के बाद कोई भी अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी नहीं निकला। जयपाल सिंह के पुत्र जयंत जयपाल सिंह मुंडा अपने पुश्तैनी गांव टकरा में 2020 में यह रहे हैं। उन्होंने कहा-2019 में पिता के नाग पर स्पोर्ट्स एकेडमी बनाने की मांग की थी। जयपाल सिंह के बेटे ने कहाः मैदान खराब, इसलिए जयंती पर होने वाला मैच टकरा की जगह खूंटी में होगा जयंत मुंडा ने कहा- जब मैं छोटा था, तो हड्डा (जयपाल सिंह मुंडा) हमें नियमित रूप से टकरा लेकर जाते थे और हमें अपनी पसंदीदा जगहें दिखाने में बहुत गर्व महसूस करते थे। कहा मैदान जहां उन्होंन खेलना शुरू किया था, यह जंगल जहां वह पक्षियों का शिकार करते थे, नदी जहां वह तैरते थे। आज डड्डा रहते तो वह भी उस खेल के मैदान को पहचान नाहीं पाते, कोंकि वह अस्त-व्यस्त पड़ा है। शम उनकी जयंती पर टकरा में हॉकी टूर्नमेंट कराना चाहते थे, लेकिन मैदान खराब होने के कारण यह टूर्नमेंट सरांग गोनके जयपाल सिंह स्पोर्ट्स अकादमी के एस्ट्रोटर्फ पर होगा।

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