गढ़वा जिले के मजदूरों की लगातार अन्य प्रदेशों में मौत के मामले सामने आते हैं। हालांकि मृतक मजदूरों के आश्रितों को इस अनुपात में सरकार की ओर से मिलने वाला लाभ नहीं मिल पाता है। श्रम विभाग के आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले के विभिन्न गांवों के आठ मजदूरों की अन्य प्रदेशों में मौत के आंकड़े हैं, जिन्हें अनुदान की राशि मुहैया कराई गई है। जबकि छह अन्य मजदूरों की मौत विभिन्न प्रदेशों में हुई है। जिनके आश्रितों को लाभ नहीं मिल सका है। मृतक मजदूरों में सर्वाधिक डंडई प्रखंड के पांच मजदूर शामिल हैं। मृतक मजदूरों में गढ़वा प्रखंड के मेढ़ना कला गांव निवासी राम विकास चौधरी, लालदेव रजवार, लखना गांव निवासी उपेंद्र राम, महुलिया निवासी भुखन भुइंया, बंशीधर नगर के चेचरिया गांव निवासी एहसान खान, केतार प्रखंड के चौरा गांव निवासी विमलेश कुमार पासवान, रमना गांव निवासी आनंद कुमार पासवान व मेराल प्रखंड के चामा गांव निवासी नरेश चौधरी के आश्रितों को श्रम विभाग की ओर से मुआवजा की राशि मुहैया कराई गई है। वहीं मेराल प्रखंड के कुशमही गांव निवासी संजय कोरवा, डंडई प्रखंड के डंडई गांव निवासी धर्मेंद्र सिंह व सुप्रीम कुमार, जरही गांव निवासी नवल प्रजापति, रारो गांव निवासी जितेंद्र सिंह व अशोक के परिजनों को लाभ नहीं मिला। किसी तरह जीवन गुजार रहे हैं आश्रित : ग्रामीण जिले के मेराल प्रखंड के कुशमही गांव निवासी मृतक मजदूर संजय कोरवा की पत्नी तेतरी देवी दो छोटे बच्चों के साथ जिंदगी की जंग लड़ रही है। पति के मौत के बाद दस किलोमीटर दूर जंगल से सूखी लकड़ी चुनकर तेतरी देवी अपने दोनों बच्चों का भरण-पोषण करतीं है। कंद-मूल व गेंठी पारंपरिक भोजन ही सहारा है। रहने के लिए पक्का मकान नहीं, प्लास्टिक के सहारे दो कमरों का कच्चा मकान है। सरकार की ओर से पेंशन व राशन का लाभ मिलता है। पति संजय कोरवा की मौत आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में अगस्त महीने में हो गई।


