गोरखपुर में डॉ. अनुज सरकारी पर दर्ज हुई FIR:पत्नी को दिखाने गए सिपाही की कर्मचारियों संग की थी पिटाई, पुलिस नहीं सुनी तो कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुआ केस

गोरखपुर के चर्चित हतौड़ाकांड में आखिरकार साढ़े तीन महीने बाद सिपाही पंकज को भी न्याय मिलने लगा। शनिवार को डॉ. अनुज सरकारी, पत्नी माधवी और उनके कर्मचारियों के खिलाफ कोर्ट ने केस करने का आदेश दिया है। महीनों गोरखपुर पुलिस से न्याय की गुहार लगाकर थक गए, लेकिन बड़े-बड़े दावे करने वाली गोरखपुर पुलिस डॉक्टर के रसूख के आगे नतमस्तक दिखी। इसके बाद सिपाही पंकज और उसकी पत्नी कोर्ट की शरण में गए थे। शनिवार को विशेष न्यायाधीश (SC/ST. एक्ट) ने दलित सिपाही पंकज कुमार के साथ जातिसूचक गालियां देने, बर्बरता और जानलेवा हमले के आरोप में यह आदेश जारी किया। विधान परिषद सदस्य का बयान
विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने कोर्ट के आदेश को “सत्य और न्याय की जीत” बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला लोकतंत्र में लोगों की आस्था को मजबूत करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉक्टर अनुज सरकारी ने अपने प्रभाव और रसूख का इस्तेमाल कर सिपाही पंकज कुमार को जेल भिजवा दिया था, लेकिन न्यायालय के इस आदेश ने सच्चाई को उजागर किया है। क्या है पूरा मामला?
3 और 4 अक्टूबर 2024 को सिपाही पंकज कुमार अपनी बीमार पत्नी के इलाज के लिए गैस्ट्रो लीवर अस्पताल पहुंचे थे। आरोप है कि अल्ट्रासाउंड फीस को लेकर डॉक्टर अनुज सरकारी ने सिपाही के साथ जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और मारपीट की। आरोप यह भी है कि डॉक्टर और उनके कर्मचारियों ने लोहे की रॉड और डंडों से सिपाही को बुरी तरह घायल कर दिया। सिपाही को जबरन डॉक्टर की पत्नी डॉ. माधवी के कमरे में ले जाकर भी पीटा गया। घटना के बाद डॉक्टर ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए सिपाही को जेल भिजवा दिया। न्याय के लिए हुआ खूब आंदोलन
विधान परिषद सदस्य देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि इस मामले में न्याय दिलाने के लिए अधिवक्ताओं, बुद्धिजीवियों, छात्रों और नागरिकों ने मिलकर आंदोलन किया। उन्होंने इस मुद्दे को विधान परिषद में भी उठाया, लेकिन डॉक्टर के प्रभाव के कारण प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। कोर्ट के आदेश पर FIR हुई दर्ज
अब, कोर्ट के आदेश के बाद डॉक्टर अनुज सरकारी, उनकी पत्नी डॉ. माधवी, और उनके कर्मचारियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। कोर्ट ने पाया कि सिपाही के साथ अत्याचार और क्रूरता की गई। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि मामले में शीघ्र आरोप पत्र दाखिल कर आरोपियों को जेल भेजा जाए।

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