इंदौर में दूषित पानी के कारण हुईं 16 मौतों के बाद झाबुआ जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर आ गया है। कलेक्टर नेहा मीना के निर्देश पर जिले के सभी शहरों में एसडीएम और पीएचई (PHE) विभाग की टीमों ने वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और जल प्रदाय केंद्रों का बारीकी से निरीक्षण किया। प्रशासन का मकसद यह तय करना है कि कहीं भी गंदा पानी पीने के पानी में न मिल पाए। शहरों में चला सघन जांच अभियान झाबुआ शहर में एसडीएम अवनधती प्रधान ने लैब और फिल्टर प्लांट की जांच की। टीम ने बस स्टैंड और गणेश मंदिर जैसे सार्वजनिक स्थानों से पानी के सैंपल भी लिए। थांदला में एसडीएम महेश मंडलोई ने वार्ड नंबर 13 के निवासियों से बात की। लोगों ने नगर परिषद की सप्लाई पर संतोष जताया। अधिकारियों ने फिल्टर प्लांट का जायजा लिया और पाइपलाइनों में लीकेज न होने देने के सख्त निर्देश दिए। मेघनगर में एसडीएम रितिका पाटीदार ने प्लांट का निरीक्षण किया और सीएमओ राहुल वर्मा की मौजूदगी में लैब के अंदर पानी के नमूनों की जांच कराई। पेटलावद में एसडीएम तनुश्री मीणा ने पानी की टंकियों और वार्डों का जमीनी मुआयना किया। उन्होंने जल स्रोतों के आसपास सफाई बनाए रखने के निर्देश दिए। इंदौर जैसी घटना रोकने की तैयारी अधिकारियों ने साफ कर दिया है कि इंदौर जैसी घटना रोकने के लिए जिले के सभी फिल्टर प्लांटों की नियमित जांच की जाएगी। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि पानी की क्वालिटी के साथ खिलवाड़ करने वालों या लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


