समरावता प्रकरण में जेल में बंद नरेश मीणा में समर्थन में लोग खुलकर सामने आ रहे है। नरेश मीणा के सपोर्ट में लोग अब गांव के नाम के साथ नरेश मीणा का नाम या स्लोगन लिख रहे है। समरावता गांव में भी लोगों ने गांव के नाम के बोर्ड में ‘नरेश भाई का समरावता’ लिखवा दिया है। इतना ही नहीं गांव के नाम के बोर्ड पर इंकलाब जिंदाबाद’ और भगत सिंह के स्लोगन भी लिखवा दिए है।
समरावता गांव में हुई इस शुरूआत के बाद और भी कई गांवों में नरेश मीणा के समर्थन में बोर्ड लग चुके है। हाल ही केदारा गांव में रोड किनारे नरेश मीणा का बोर्ड लगाकर उसके समर्थन में जोरदार नारेबाजी भी की गई थी। संघर्ष याद रहे, इसलिए लगवाये जा रहे बोर्ड
नरेश मीणा के समर्थकों ने उसे अपना आदर्श बताते हुए कहा कि हमने भगत सिंह के बारे में पढ़ा था, सुना था, लेकिन देखा नहीं था। हम भगत सिंह के रूप में नरेश मीणा को देख रहे है। नरेश मीणा गरीब, किसान और आमजन के साथ होने वाले अन्याय के खिलाफ जिस तरह से भगत सिंह की तरह लड़ रहा है, वह आज के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका संघर्ष आने वाली पीढ़ी को भी याद रहे, इसलिए गांव-गांव में उनके बोर्ड लगवाये जा रहे है। यह था मामला
13 नवंबर 2024 को देवली-उनियारा विधानसभा के उपचुनाव के लिए मतदान हुआ था। इसमें समरावता गांव के लोगों ने उनके गांव को उनियारा उपखंड कार्यालय में शामिल करने की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार कर रखा था। उस समय निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा भी ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठ गया था। मतदान बहिष्कार के बावजूद 3 लोगों के जबरन वोट दिलाने का आरोप लगाते हुए नरेश मीणा ने SDM अमित चौधरी को थप्पड़ मार दिया था। दूसरे दिन 14 नवंबर 2024 को पुलिस ने नरेश मीणा को धरना स्थल से गिरफ्तार कर लिया था। फिर कोर्ट के आदेश पर 15 नवंबर को जेल भेज दिया था।


