इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौत के बाद अब जबलपुर जिला प्रशासन भी जागा है। छुट्टी के दिन कलेक्टर और नगर निगम कमिश्नर अधिकारियों के शहर के अलग-अलग वाटर प्लांट पहुंचकर निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने वाटर प्लांट से शहर के अलग-अलग इलाकों में सप्लाई किए जा रहे पानी को पीकर चेक किया। जिला प्रशासन का कहना है कि लैब टेस्टिंग और विभिन्न मानकों में पानी की गुणवत्ता संतोषजनक है। इधर कांग्रेस ने जिला प्रशासन के दावों को गलत बताया है। कांग्रेस नगर अध्यक्ष ने कार्यकर्ताओं के साथ शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर वीडियो-फोटो बनाकर सोशल मीडिया मे पोस्ट करते हुए हकीकत दिखाई है। इंदौर घटना के बाद पेयजल व्यवस्था पर अचानक जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह और नगर निगम आयुक्त राम प्रकाश अहिरवार ने अधिकारियों के साथ रमनगरा, भोंगाद्वार, रांझी और गौर नदी स्थित जल शोधन संयंत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने गुणवत्ता को जांचने के लिए खुद पानी पीकर शुद्धता परखी। कलेक्टर-कमिश्नर की मौजूदगी में पेयजल की लैब टेस्टिंग भी करवाई गई, जिसे विभिन्न मानकों पर संतोषजनक बताया गया। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने कहा कि फिलहाल शहर में की जा रही जल आपूर्ति पूरी तरह पीने योग्य और मानक स्तर की है। कलेक्टर ने साफ शब्दों में अधिकारियों को चेताया कि पेयजल की डेली जांच अब अनिवार्य होगी। जल स्रोतों, पाइपलाइनों में लीकेज या किसी भी प्रकार के प्रदूषण की संभावना को तुरंत खत्म किया जाए। पानी हर हाल में संक्रमण मुक्त होना चाहिए। लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सैंपलिंग बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए हैं। 23 टेस्ट प्रतिदिन किए जाते हैं। 300 एमएलडी इन प्लांट से पानी सप्लाई किया जाता है। निरीक्षण के दौरान नगर निगम का तकनीकी अमला भी सक्रिय रहा। मौके पर अधीक्षण यंत्री कमलेश श्रीवास्तव, सहायक यंत्री राजेश खंपरिया, उपयंत्री मंसूरी और शमीम खान सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे। कलेक्टर के निरीक्षण पर कांग्रेस ने तंज कसा है। नगर अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने कहा कि कलेक्टर-कमिश्नर शहर के अलग-अलग प्लाटों में जाकर निरीक्षण करते हुए वहां का पानी जरूर पिया है, पर यह सब शहर की जनता को दिखाने के लिए खानापूर्ती है । उन्होंने कहा कि हम सालों से कह रहे है कि जबलपुर में ई-कोली (E. coli) कोलीफॉर्म बैक्टीरिया जो कि टंकी से निकली पाइप लाइन जो कि नाले से होकर गुजर रही है, वहीं बाद में आम आदमी के किचन तक पहुंच रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस से भाजपा में गए महापौर जगत बहादुर अन्नू भी हमारी मुहिम में शामिल हुए थे। उन्होंने भी माना था कि जबलपुर में जो पानी है, वह प्रदूषित है। अब जब वह कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए तो पानी अब सही हो गया है। महापौर कह रहे हैं कि जबलपुर का पानी शुद्ध है। नगर अध्यक्ष सौरभ शर्मा ने कहा कि आज भी शहर के कई इलाकों में जाकर देखा गया कि गंदे नालों से होकर पाइप जा रहे है। नालियों के ऊपर नल लगे हुए है। उन्होंने कहा कि सोमवार से कांग्रेस के कार्यकर्ता शहर के अलग-अलग स्थानों में घूमकर प्रशासन को हकीकत दिखाने का काम करेगा। महापौर के वार्ड में जाकर वहां के पानी को टेस्ट करवाया जाएगा। सौरभ शर्मा ने बताया कि एक लीटर पानी में ई-कोली की मात्रा मात्र 10एमएल होना चाहिए थी, वह कहीं तीन सौ है, चार सौ है। यह सब सार्वजनिक तौर पर रखा गया था। पर चाहे जनप्रतिनिधि हो या अधिकारी आज भी हाल वहीं है, जो जबलपुर शहर की जनता के लिए बहुत बड़ा खतरा है।


