नर्सिंग कॉलेजों में गड़बड़ी को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई में अनोखा मामला सामने आया। गुना के ओंकार नर्सिंग कॉलेज ने याचिका दायर कर कहा कि सीबीआई जांच में उनके कॉलेज को पहले सूटेबल माना था, बाद में सीबीआई को सूचना मिली कि एक ही भवन में नर्सिंग और बीएड कॉलेज चल रहा है। इसके बाद सीबीआई ने संस्था को अनसूटेबल श्रेणी दी है।
यह पूरा घटनाक्रम शुक्रवार को हुई सुनवाई की प्रोसिडिंग में दर्ज है। जस्टिस संजय द्विवेदी और जस्टिस अचल कुमार पालीवाल की पीठ के समक्ष कॉलेज संचालक ने दावा किया कि संस्था के पास (ग्राउंड + 3 मंजिल) हैं। नर्सिंग कॉलेज ग्राउंड प्लस दो मंजिल और शीर्ष मंजिल में बीएड कॉलेज चल रहा है। आईएनसी नियमों के अनुसार, एक भवन में अलग फ्लोर में दो कॉलेज चल सकते हैं ।
हाईकोर्ट ने महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को निर्देश दिए कि तुरंत जिला मजिस्ट्रेट से मौके का निरीक्षण करने के लिए कहें। चलती सुनवाई में ही कॉलेज का निरीक्षण हुआ। इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग देखने के बाद हाईकोर्ट ने आदेश में लिखा कि टॉप फ्लोर में बीएड कॉलेज और ग्राउंड+टू फ्लोर में नर्सिंग कॉलेज चलाया जा रहा है। एक भवन में दो अलग पाठ्यक्रम चलाने के लिए कोई प्रतिबंध नहीं है, लेकिन नियमानुसार नर्सिंग कॉलेज के लिए अकादमिक भवन के रूप में 19 हज़ार वर्गफीट न्यूनतम बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है, जबकि बीएड कॉलेज के लिए आवश्यक तीस हज़ार वर्गफीट खुली भूमि और बीस हजार वर्गफीट निर्मित क्षेत्र न्यूनतम बुनियादी ढांचा होना चाहिए। कोर्ट ने कहा- दखल दिए जाने योग्य मामला नहीं
हाई कोर्ट ने कहा, सीबीआई के पंचनामा और जिला मजिस्ट्रेट द्वारा भेजी वीडियो-रिकॉर्डिंग से स्पष्ट है कि याचिकाकर्ता द्वारा चलाए जा रहे दोनों पाठ्यक्रमों के लिए कुल क्षेत्रफल 24912 वर्गफीट है और 3956 वर्गफीट क्षेत्र निर्माणाधीन है। बीएड और नर्सिंग कोर्स की आवश्यकता के अनुसार कुल निर्मित क्षेत्रफल उनतालीस हजार (20000+19000) वर्गफीट होना चाहिए। इससे प्रमाणित होता है कि संस्था के पास दोनों पाठ्यक्रम चलाने हेतु पृथक क्षेत्रफल उपलब्ध नहीं है। सीबीआई द्वारा संस्था को अनसूटेबल श्रेणी में रखने का निर्णय दखल के योग्य नहीं है। इसी आधार पर याचिका खारिज कर दी गई।


