इनामी नक्सलियों की होती थी बैठक ऋषिकेश| चाईबासा ढाई दशक तक नक्सलवाद और पीएलएफआई उग्रवाद का दंश झेले पोड़ाहाट की वादियों में अमन की हवा बह रही है। ताजा उदाहरण सोनुआ प्रखंड का पनसुवां डैम और बंदगांव का नाकटी डैम हैं। दोनों डैम में नक्सलियों के दरबार लगने और जेएलटी, पीएलएफआई जैसे गिरोहबाजों के चौपाल लगने के कई किस्से हैं। खून खराबे, आगजनी, सीरिज मंे पुलिस को टारगेट करते हुए बम लगाने की घटनाओं को अंजाम देने का प्लान दोनों डैम के मेढ़ पर बनता था। 2010 से लेकर 2020 तक का हाल ऐसा था कि इधर कोई भला मानुष आना नहीं चाहता था। अब पुलिस-पारा मिलिट्री और जिला प्रशासन के साथ स्थानीयों की पहल पर बहुत कुछ बदल गया है। दोनों डैम पर्यटकों की पंसदीदा जगहों में शामिल है। पर्यटन विभाग व जिला प्रशासन ने दोनोें जगह बोटिंग के अलावा मछली केज लगा दिया है। बदलाव की नई बयार से स्थानीयों को रोजगार भी मिल रहा। रोजाना दोनों स्थान पर 2 से 3 हजार लोगों की भीड़ जुट रही है। पुलिस का पहरा भी है, स्थानीयों की निगरानी भी। इस बड़े बदलाव से सुकून के दिन हैं। एनएच 75 के कराईकेला थाना से कुछ दूरी पर नाकटी डैम एरिया पीएलएफआई, जेएलटी व माओवादियों का अड्ढा था। रांची, खूंटी, टेबो पहाड़ियों से उतर कर यहीं ठहरते। साल 2017 तक पुलिस तभी जाती जब भारी पुलिस बल रहता था। माओवादी बंदी मतलब सन्नाटा, कोई नहीं जाता। डैम के ऊपर नवादा रोड में 25 सीरिज बम मिले थे। गाड़ियों को जलाना, लेवी के लिए ठेकेदारों को यहीं बुलाते थे। माओवादी लीडर 25 लाख का इनामी महाराज प्रमाणिक यहां पिकनिक मनाने आते तो जेएलटी के अजय, जितेन, शनिचर का गैंग महंगी बाइक से हथियारों के साथ यहीं रुकता था। कई बड़े इनकाउंटर, सरेंडर यहीं हुए। अब यहां बोटिंग हो रही है। पर्यटक पहुंच रहे हैं। ग्रामीणों को रोजगार मिल रहा है। सोनुआ प्रखंड के पनसुवां डैम तक 2018 तक सड़क नहीं थी। पुलिस डैम तक जाने से कतराती थी। स्पेशल अभियान में ही पुलिस उधर जाती थी। दर्जन भर इनकाउंटर, 200 से ज्यादा आइडी मिले। यहां के डैम में बने रेस्ट हाउस को नक्सलियों ने उड़ा दिया था। यहां 2022 तक पीएलएफआई सुप्रीमो दिनेश गोप अड्डेबाजी करता था। मुठभेड़ भी हुई। विकास दा नाम से चर्चित कुंदन पाहन, संदीप सुरीन सरीखे बड़े नेता अब जेल मेंे बंद हैं। किशन दा यहां जन अदालत लगा चुके हैं। अब यह सैर सपाटा का शानदार लोकेशन है। पनसुवां डैम : सैर सपाटा आम है पहले यहां लगती थी जन अदालत नकटी डैम : कभी उतरते थे उग्रवादी, अब वहां बोटिंग हिरणी फॉल : यहां साल 2015 के बाद पर्यटक शाम तक ठहर रहे। पहले घबराते थे। गुदड़ी इलाका : 2021 में सात आदिवासी मारे गये। 2025 में सेंदरा चला। अब पर्यटक पहुंच रहे। सारंडा : नक्सलियों के खिलाफ अभियान चल रहा। लेकिन किरीबुरू,थोलकोबाद में पर्यटक बढ़े।


