मप्र वक्फ बोर्ड की सैकड़ों संपत्तियों को नियमों की अनदेखी कर किराए पर देने, किरायेदारी बदलने और बिना अनुमति स्थायी निर्माण की मंजूरी देने से बोर्ड को हर साल करोड़ों का नुकसान हुआ है। ईओडब्ल्यू की जांच में सामने आया कि वक्फ अधिनियम-1995 और वक्फ संपत्ति पट्टा नियम-2014 को दरकिनार कर 185 वक्फ संपत्तियों को बेहद कम किराए पर दे दिया गया। इससे बोर्ड को सालाना करीब 2.54 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। यह मामला शासन से मिली रिपोर्ट के आधार पर सामने आया। उप सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 27 जुलाई 2023 को भेजे गए पत्र के साथ वक्फ बोर्ड से जुड़े दस्तावेज और पूर्व जांच समिति की रिपोर्ट भी थी। इन्हीं तथ्यों के आधार पर भोपाल ईओडब्ल्यू ने 3 अक्टूबर 2023 को प्रारंभिक जांच दर्ज कर विस्तृत पड़ताल शुरू की थी। अब तीन अफसरों पर केस दर्ज किया गया है। जांच: करीब 185 मामलों में किरायेदारी बदली गई जांच में सामने आया कि वर्ष 2013 से 2018 के बीच इंतजामिया कमेटी औकाफ आम्मा, भोपाल के कार्यकाल में बड़े पैमाने पर अनियमित फैसले लिए गए। यह 11 सदस्यीय समिति थी, जिसके अध्यक्ष शौकत मोहम्मद थे, जबकि फुरकान अहमद और मोहम्मद जुबेर सचिव पद पर थे। समिति का कार्यकाल 13 अगस्त 2018 तक था। समिति के गठन आदेश में शर्तें थीं कि वक्फ बोर्ड की अनुमति के बगैर किसी भी संपत्ति को न लीज पर दिया जा सकता है, न बेचा जा सकता है और न ही उसमें स्थायी निर्माण करवाया जा सकता है। इसके बाद भी जांच में सामने आया कि करीब 185 मामलों में किरायेदारी बदली गई। कागजों में इसे किरायेदारी परिवर्तन बताया गया, जबकि वास्तव में पुराने किरायेदार हटाकर नए लोगों को नए पट्टे दे दिए गए। बिना विज्ञापन, बिना बोली, सीधे नाम बदलकर पट्टे
ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी सामने आया कि किरायेदारी परिवर्तन न तो किसी सार्वजनिक सूचना के जरिए किया गया, न आवेदन बुलाए गए। यहां तक की वक्फ बोर्ड की अनुमति तक नहीं ली गई। कई मामलों में ब्लड रिलेशन का हवाला देकर भी किरायेदारी बदलने की बात सामने आई, जो जांच में सही नहीं पाई गई। नियमों के तहत सार्वजनिक नोटिस, अखबारों में विज्ञापन और ज्यादा किराया देने वाले को प्राथमिकता देना अनिवार्य था, लेकिन इन प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। 59 करोड़ की संपत्तियां, किराया सिर्फ 21 लाख
जांच के अनुसार जिन 185 वक्फ संपत्तियों में गड़बड़ी की गई, उनका कुल क्षेत्रफल 83,390 वर्गफीट है। कलेक्टर गाइडलाइन के मुताबिक इनकी कीमत 59.60 करोड़ रुपए से ज्यादा थी। नियमों के अनुसार इनसे हर साल करीब 2.76 करोड़ किराया मिलना चाहिए था। वास्तव में केवल 21 लाख रुपए सालाना किराया ही वसूला गया। इस तरह वक्फ बोर्ड को हर साल करीब 2.54 लाख से ज्यादा का नुकसान हुआ। अवैध निर्माण को भी मिली हरी झंडी
जांच में यह भी सामने आया कि कई वक्फ संपत्तियों पर बिना अनुमति स्थायी निर्माण की स्वीकृति दे दी गई। यह सीधे तौर पर वक्फ अधिनियम और पट्टा नियमों का उल्लंघन है। इन अनियमितताओं से निजी व्यक्तियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया। इन पर हुई कार्रवाई
जांच पूरी होने के बाद अब ईओडब्ल्यू ने तत्कालीन मुतवल्ली शौकत मोहम्मद, सचिव फुरकान अहमद और सह-सचिव मोहम्मद जुबेर के खिलाफ धोखाधड़ी व आपराधिक साजिश के तहत केस दर्ज किया है। जांच एजेंसी ने उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में भी आरोपी बनाया है।


