बूंदी के धनेश्वर कस्बे में बुजुर्ग दंपती ने अपने बेटे के जन्मदिन पर मृत्यु उपरांत देहदान करने का संकल्प लिया है। उनकी इस अनोखी पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। भंवर लाल सुवालका (84) और उनकी पत्नी धनी बाई सुवालका (80) ने विधिवत रूप से संकल्प पत्र भरकर यह घोषणा की कि उनके शरीर का उपयोग मृत्यु के पश्चात चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए दान किया जाएगा। यह निर्णय उन्होंने अपने पुत्र विनोद कुमार सुवालका के जन्मदिन के अवसर पर लिया। आमतौर पर लोग जन्मदिन पर उपहार देते हैं या पार्टियों का आयोजन करते हैं, लेकिन सुवालका दंपती ने इस अवसर को मानवता की सेवा के लिए समर्पित किया। उन्होंने समाज के सामने एक नई और प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। बुजुर्ग दंपती ने बताया कि देहदान से न केवल मेडिकल छात्रों को सीखने का अवसर मिलता है, बल्कि यह मृत्यु के बाद भी समाज के काम आने का एक जरिया है। उन्होंने कहा, “बेटे के जन्मदिन पर इससे बड़ा और नेक काम कोई दूसरा नहीं हो सकता था।” भंवर लाल और धनी बाई सुवालका ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, “मृत्यु के बाद भी हमारा शरीर किसी के काम आ सके, यही सबसे बड़ा पुण्य है। हमने अपने पुत्र के जन्मदिन को सार्थक बनाने के लिए यह निर्णय लिया है।” ग्रामीणों का कहना है कि सुवालका दंपती का यह कदम अंधविश्वासों को तोड़कर समाज को नई दिशा दिखाने वाला है। उनकी इस नेक पहल की पूरे क्षेत्र में सराहना की जा रही है।


