प्रदेश में बीसलपुर के पानी के बंटवारे और प्रदेश में पेयजल की स्थिति को लेकर आज हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि हमारी तो मंशा है कि प्रदेश के हर नल में पानी पहुंचना चाहिए। दरअसल सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि पानी पॉलिसी का विषय है। जनहित याचिका लगाकर यह तय नहीं किया जा सकता है कि सरकार किसे कितना पानी दे। इस पर जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हमारी तो मंशा है कि हर घर तक पानी पहुंचना चाहिए। इस पर सरकार ने पॉलिसी पेश करने के लिए कोर्ट से समय मांगा। इस पर कोर्ट ने सुनवाई टालते हुए सरकार को 4 सप्ताह का समय दिया। बीसलपुर से पहले पीने का पानी दिया जाए मामले में न्याय मित्र अधिवक्ता प्रतीक कासलीवाल ने बताया कि हाईकोर्ट ने साल 2020 में लोकेंद्र सिंह की पत्र याचिका पर प्रसंज्ञान लिया था। पत्र याचिका में कहा गया था कि बीसलपुर बांध से जयपुर, अजमेर, भीलवाड़ा और टोंक जिले के लोगों को पेयजल का पानी सप्लाई किया जाता है। वहीं बांध से कृषि के लिए भी पानी दिया जा रहा हैं। लेकिन नियमों के अनुसार बांध में पानी का लेवल 24 टीएमसी होने पर ही कृषि के लिए पानी दिया जा सकता है। ऐसा नहीं होने पर पेयजल का गंभीर संकट पैदा हो सकता है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने प्रदेश में पेयजल की स्थिति को लेकर भी स्वप्रेरित प्रसंज्ञान लिया था। जिसमें कहा गया था कि 2010 में पानी को लेकर पॉलिसी बनी थी। जिसे आज तक प्रदेश में लागू नहीं किया गया है। इन तमाम बिंदुओं को लेकर आज हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। जिस पर सरकार ने जवाब पेश करने के लिए अदालत से समय मांगा।


