भास्कर न्यूज|लुधियाना पंजाब भर के डिपुओं के बाहर गेट रैलियां कर संघर्ष के दौरान जेल में बंद साथियों की रिहाई की मांग की गई। पंजाब रोडवेज पनबस/पीआरटीसी कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन पंजाब की ओर से पूरे प्रदेश के डिपुओं पर गेट रैलियां आयोजित की गईं। लुधियाना डिपो के गेट पर राज्य महासचिव शमशेर सिंह ढिल्लों ने कहा कि कच्चे कर्मचारी लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन हर सरकार ने टालमटोल की नीति अपनाई। आम आदमी पार्टी सत्ता में आने से पहले कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने और विभागों को सशक्त करने का वादा करती थी। कर्मचारियों ने बसों में बड़े स्तर पर प्रचार कर सरकार बनने में योगदान दिया, लेकिन चार साल बीतने के बावजूद एक भी कर्मचारी को पक्का नहीं किया गया। उन्होंने बताया कि सरकार के साथ 55–60 बैठकें और मुख्यमंत्री के साथ 2–3 बैठकें हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री द्वारा एक माह में समाधान का लिखित भरोसा दिया गया था, जिसे अब डेढ़ साल से अधिक हो चुका है। न तो नियमितीकरण की नीति बनी और न ही आउटसोर्सिंग/कॉन्ट्रै क्ट नीति। उल्टा संघर्षरत कर्मचारियों पर झूठे मामले दर्ज कर 307 जैसी धाराओं में जेल भेजा गया। कुछ साथी आज भी संगरूर जेल में बंद हैं। पीआरटीसी से राज्य नेता जगतार सिंह ने कहा कि किलोमीटर स्कीम के जरिए विभागों का निजीकरण किया जा रहा है। आंदोलन के दौरान नेताओं को घरों से उठाकर हिरासत में लिया गया, पुलिस द्वारा ज्यादती हुई और शांतिपूर्ण संघर्ष दबाने की कोशिश की गई। करीब 177 कर्मचारियों को बिना कारण जेल में रखा गया और 20 पर 307 के तहत केस दर्ज हुए, जिनमें से 10 आज भी संगरूर जेल में हैं। नेताओं ने कहा कि सरकार के पास पनबस/पीआरटीसी का फ्री यात्रा मद का करीब 1200 करोड़ रुपये बकाया है। यदि यह राशि दी जाए तो अधिकांश समस्याएं हल हो सकती हैं। हर महीने वेतन के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है; इस महीने लोहड़ी का त्योहार है, फिर भी वेतन की कोई उम्मीद नहीं। डिपो नेताओं जतिंदर सिंह, संदीप सिंह, गुरप्रीत सिंह बड़ैच, प्रवीण कुमार, हरशरण सिंह, जसपाल सिंह और सतगुरु सिंह ने ऐलान किया कि गेट रैली के बाद सभी कर्मचारी काली पट्टी बांधकर ड्यूटी करेंगे। यदि मांगें नहीं मानी गईं और जेल में बंद साथियों को तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो 09 जनवरी 2026 को संगरूर बस स्टैंड पर विशाल शांतिपूर्ण कन्वेंशन कर अगले संघर्ष का ऐलान किया जाएगा।


