जिले में आयोजित ग्रामीण खेल उत्सव के दौरान बच्चों की मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुति ने सभी का दिल जीत लिया। पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में सजे बच्चों ने मंच पर ऐसा समां बांधा कि कार्यक्रम में मौजूद अतिथि और दर्शक तालियों की गड़गड़ाहट के साथ झूम उठे। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने आदिवासी संस्कृति से जुड़े “जंगल रखवाला” गीत पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। ढोल, मांदर और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की थाप पर बच्चों के तालबद्ध कदम और भाव-भंगिमाओं ने आदिवासी जीवनशैली और प्रकृति से जुड़ाव को जीवंत कर दिया। प्रस्तुति के दौरान बच्चे आत्मविश्वास और उत्साह से भरे नजर आए, वहीं दर्शक भी उनके साथ गीत की धुन पर झूमते दिखाई दिए। अतिथियों ने बच्चों की कला, मेहनत और अनुशासन की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी प्रस्तुतियां नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम हैं। ग्रामीण खेल उत्सव के मंच से बच्चों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलना निश्चित ही उनके आत्मविश्वास को बढ़ाने वाला है। कार्यक्रम के आयोजकों ने बताया कि ग्रामीण खेल उत्सव का उद्देश्य खेलों के साथ-साथ लोक संस्कृति, परंपरा और आदिवासी पहचान को बढ़ावा देना है। बच्चों की यह प्रस्तुति पूरे उत्सव का आकर्षण बन गई और लंबे समय तक दर्शकों की स्मृतियों में बनी रहेगी।


