राज्य में कई भवन ऐसे हैं जो करोड़ों की लागत से बने हैं, लेकिन बनने के बाद सालों से न तो इस्तेमाल में लाए गए और न ही लोगों को इसका फायदा मिला। 14 साल के वनवास के बाद डेढ़ साल पहले सदर अस्पताल के नए भवन की शुरुआत की जा सकी। लेकिन इसी के साथ बन रहे डॉक्टर्स क्वाटर की बिल्डिंग डेड एसेट बन चुकी है। सिर्फ यही नहीं, ओरमांझी के पांचा गांव में 7 करोड़ से बना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी तैयार होने के बाद एक बार भी इस्तेमाल में नहीं लाया गया। जब भवन तैयार हो गया, तब अधिकारियों को ख्याल आया कि सीएचसी गलत स्थान पर बन गया है, यहां लोगों को आकर इलाज कराने में परेशानी होगी। इसके बाद यह भवन भी डेड एसेट बन कर रह गया। इस रिपोर्ट से जानिए उन भवनों की वर्तमान स्थिति… स्वास्थ्य केंद्र, ओरमांझीलागत: 7 करोड़निर्माण आरंभवर्ष : 2012 ओरमांझी के पांचा में 7 करोड़ से बने स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) तक जाने का रास्ता भी नहीं ओरमांझी के पांचा पंचायत भवन के सामने करीब 13 साल पहले स्वास्थ्य केंद्र बनवाया गया था। जानकारी के अनुसार, इस भवन को तैयार कराने में स्वास्थ्य विभाग ने 7 करोड़ रुपए खर्च किए, पर आज तक इसे हैंडओवर नहीं लिया जा सका। आसपास के लोग बताते हैं कि जिस स्थान पर अस्पताल बनाया गया, वह सही नहीं था। रास्ता तक नहीं है। भवन तैयार होने के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने यहां सीएचसी शिफ्ट करने से इंकार कर दिया था। डॉक्टर्स क्वार्टर, सदर अस्पताललागत: 20 करोड़निर्माण आरंभवर्ष : 2008 सदर अस्पताल परिसर में ही एक और भ्रष्टाचार का अधूरा भवन है, जो 17 साल बाद भी पूरा नहीं हो सका। परिसर में डॉक्टर्स क्वार्टर की इमारत तो तैयार हो गई, रंग-रोगन भी हुआ, लेकिन भवन हैंडओवर नहीं होने के कारण इस्तेमाल में नहीं लाया जा सका। जानकारी के अनुसार, भवन को जिस अनुरूप तैयार करना था, वैसा काम नहीं होने के कारण हैंडओवर लेने से इंकार कर दिया गया था। करीब 7-8 साल से भवन का काम अधूरा ही छोड़ दिया गया है। भवन की स्थिति ऐसी हो गई है कि कई फ्लोर की दीवारें दरक गई हैं। भवन जर्जर हो रहा है। 13 साल हो गए, भवन के आसपास झाड़ियां उग आईं 17 साल बाद भी 7 मंजिला डॉक्टर्स क्वार्टर अधूरा… सीरीज-1 क्या कहते हैं अधिकारी: सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि यह काफी पुरानी बिल्डिंग है। किस परिस्थिति में उस स्थान का चयन हुआ था, यह कहना मुश्किल है। पर भवन का दूसरे काम में उपयोग हो, यह देखना चाहिए। क्या कहते हैं अधिकारी: सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने कहा कि भवन की मरम्मत कर हैंडओवर के लिए विभाग को पत्राचार किया गया है। चूंकि भवन सालों से बंद है तो इसमें मरम्मत करानी जरूरी है। यह प्रक्रियाधीन है। आम लोगों पर असर : यदि पांचा गांव में सीएचसी शुरू हो जाता तो आसपास के कई गांवों के लोगों को नजदीक में चिकित्सा सुविधा मिलनी शुरू हो जाती। अभी गांव के लोगों को 8 से 10 किमी. दूर दूसरे पंचायत जाकर इलाज कराना पड़ता है। आम लोगों पर असर : इस बिल्डिंग में सदर अस्पताल में कार्यरत चिकित्सकों को फ्लैट देने की योजना थी, ताकि डॉक्टर्स हॉस्पिटल रात में भी कैंपस में ही रह सकें। इससे मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा दी जा सकती थी। जनता का पैसा हो गया बर्बाद, कौन है इसका जिम्मेवार…


