वनांचल के ग्राम कुई स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक स्कूल के विद्यार्थियों ने नया रायपुर, पुरखौती मुक्तांगन, चम्पारण, राजिम, जतमई और घटारानी का यादगार शैक्षणिक भ्रमण किया। यह यात्रा बच्चों के लिए न केवल शिक्षाप्रद रही, बल्कि उनके सामाजिक और सांस्कृतिक अनुभवों को भी समृद्ध करने का अवसर बनी। यात्रा की शुरुआत विद्यार्थियों ने नया रायपुर स्थित पुरखौती मुक्तांगन से की। जैसे ही बच्चे इस विशाल और हरियाली से भरे पार्क में पहुंचे, उनके चेहरे पर उत्सुकता झलक रही थी। पुरखौती मुक्तांगन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर का प्रतीक है। यहां पर विभिन्न पारंपरिक झोपड़ियां, लोकनृत्य, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक प्रस्तुति देखकर बच्चों ने राज्य की विविधता और धरोहर को नजदीक से महसूस किया। यह अनुभव कक्षा में पढ़ाई से बहुत अलग और यादगार था। महाप्रभु वल्लाभाचार्य की जन्मस्थली भी पहुंचे बच्चे इसके बाद छात्र चम्पारण पहुंचे, जो रायपुर से लगभग 60 किलोमीटर दूर स्थित है। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और महाप्रभु वल्लभाचार्य की जन्मस्थली होने के कारण प्रसिद्ध है। बच्चों ने यहां धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के बारे में जानकारी हासिल की। सांस्कृतिक समझ को विकसित करने का तरीका प्रधानपाठक सभाजीत सिंह ने बताया कि शैक्षणिक भ्रमण का उद्देश्य केवल बच्चों को बाहर घूमने ले जाना नहीं है। यह उनके व्यक्तित्व, सामाजिक कौशल और सांस्कृतिक समझ को विकसित करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। जब बच्चे पुस्तक से बाहर निकलकर वास्तविक स्थलों का अनुभव करते हैं।


