जयपुर एयरपोर्ट को निजी हाथों में दिए एक साल से अधिक समय हो चुका है। अब इसका असर भी नजर आने लगा है। ताजा उदाहरण विंटर सीजन का है। जब-जब जयपुर में कोहरा छाता है तो फ्लाइट्स को तुरंत लैंडिंग की अनुमति नहीं दी जाती। पायलट को 25 से 30 मिनट तक आसमान में ही चक्कर काटने को कहा जाता है। 31 दिसंबर की रात ऐसा तीन फ्लाइट्स के साथ हुआ था। इसमें दो बेंगलुरु की और एक चंडीगढ़ की फ्लाइट थी। एलवीपी व्यवस्था लागू होने तक इन तीनों फ्लाइट की लैंडिंग होल्ड कर दी गई थी। दरअसल, एयरपोर्ट पर रात 11 बजे अचानक घना कोहरा छा गया। इंडिगो की एक फ्लाइट ने लैंडिंग के लिए अप्रोच किया तो पता चला कि रनवे पर विजुअल रेंज कम है। एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) ने पायलट को विमान को कुछ देर होल्ड पर रखने को कहा। पायलट को बताया गया कि एयरपोर्ट पर लो विजिबिलिटी प्रोटोकॉल (एलवीपी) लागू करने के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन अभी यह पूरी तरह लागू नहीं हो सका है। इसके बाद विमान ने जयपुर के आसमान में 3 से 4 चक्कर लगाए। करीब 25 मिनट बाद फ्लाइट की एयरपोर्ट पर सुरक्षित लैंडिंग हो सकी। एविएशन एक्सपर्ट का कहना है कि कोहरे की स्थिति में जब रनवे पर दृश्यता कम हो जाती है तो सेफगार्डिंग प्रोसेस करते हुए लो विजिबिलिटी प्रोटोकॉल (एलवीपी) लागू किया जाता है। इस दौरान सिविल और इलेक्ट्रिकल वर्क बंद करा दिए जाते हैं। सीएनएस के अधिकारी अपने इक्विपमेंट चैक करते हैं। इलेक्ट्रिकल वाले अपने ऑपरेशन को डीजल जनरेटर मोड पर डाल देते हैं और सीआईएसएफ सारे गेट बंद कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करती है। इस दौरान कैट-थ्री बी और आईएलएस की मदद से सिर्फ 75 मीटर दृश्यता में भी विमान की लैंडिंग कराई जाती है। एटीसी की ओर से जब एलवीपी प्रोटोकॉल लागू करने के निर्देश दिए जाते हैं तो अलग-अलग एजेंसियां अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रिपोर्ट करती हैं, लेकिन अभी एयरपोर्ट का संचालन निजी हाथों में है, ऐसे में कुछ एजेंसियों की ढिलाई की बात सामने आ रही है। ऐसे में विमान को होल्ड पर रखा जाता है।


