राज्य वृक्ष खेजड़ी की अंधाधुंध कटाई के खिलाफ पर्यावरण संघर्ष समिति की ‘खेजड़ी बचाओ–प्रकृति बचाओ’ रथ यात्रा गुरुवार को हनुमानगढ़ पहुंची। टाउन स्थित बिश्नोई धर्मशाला में इसका स्वागत किया गया। इस अवसर पर बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों ने 2 फरवरी को बीकानेर में प्रस्तावित महापड़ाव में बड़ी संख्या में शामिल होने का संकल्प लिया। जोधपुर के परसराम बिश्नोई ने बताया कि बीकानेर सहित पश्चिमी राजस्थान में सोलर प्लांट और अन्य विकास परियोजनाओं के नाम पर खेजड़ी जैसे संरक्षित वृक्षों की बड़े पैमाने पर कटाई हो रही है। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन 1730 ईस्वी में खेजड़ली में खेजड़ी की रक्षा के लिए दिए गए बलिदान की स्मृति से जुड़ा है। परसराम बिश्नोई ने जोर दिया कि खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि पूरे रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ है। इसकी सुरक्षा पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है। भागीरथ दास शास्त्री ने जानकारी दी कि रथ यात्रा के माध्यम से गांव-गांव और ढाणी-ढाणी जाकर लोगों को खेजड़ी के महत्व और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा रहा है। यात्रा का मुख्य उद्देश्य सोलर कंपनियों द्वारा की जा रही कटाई पर रोक लगाना और राज्य में एक सशक्त ‘ट्री एक्ट’ लागू करवाना है। वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि खेजड़ी बचेगी तो ही पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियां सुरक्षित रहेंगी। आंदोलन के तहत 2 फरवरी को बीकानेर में साधु-संतों के सान्निध्य में एक बड़ा महापड़ाव आयोजित किया जाएगा, जिसमें एक लाख से अधिक लोगों के जुटने का अनुमान है। सरकार द्वारा ठोस कदम उठाए जाने तक यह आंदोलन जारी रहेगा। इस मौके पर आनंद प्रकाश, सुभाष भांभू, रिछपाल, श्रीभगवान गोदारा, रामगोपाल, हनुमान बेनीवाल, प्रहलाद बिश्नोई, सांवरलाल बिश्नोई और दिनेश धारणिया सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।


