ग्राम जौंहार के मरई माता मंदिर के पास युवक से लूट के मामले में अदालत ने कड़ा फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश राजेश भंडारी की अदालत ने लूट के दोषी पहलवान उर्फ परविंदर रावत को 7 साल की सश्रम जेल और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा दी है। वहीं, सहआरोपी वीरेंद्र रावत को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। क्या है पूरा मामला यह घटना 27 मई 2023 की है। फरियादी गौरव कुशवाहा अपनी बुआ पार्वती कुशवाहा को मोटरसाइकिल से ग्राम पठारी से उनके गांव गढ़ पहाड़ छोड़ने जा रहे थे। सुबह करीब 9:30 बजे जब वे ग्राम जौंहार के पास मरई माता मंदिर पहुंचे, तभी प्लैटिना बाइक पर सवार तीन युवकों ने उनकी बाइक रोक ली। आरोपियों ने गौरव कुशवाहा से मोबाइल फोन छीना, उन्हें बाइक से गिरा दिया और उनकी मोटरसाइकिल लेकर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद गौरव कुशवाहा ने बड़ोनी थाने पहुंचकर लूट की रिपोर्ट दर्ज कराई। उन्होंने पुलिस को बताया था कि सामने आने पर वे आरोपियों को पहचान सकते हैं। पुलिस ने जांच के दौरान पहलवान उर्फ परविंदर रावत (निवासी मड़ैयन), वीरेंद्र रावत (निवासी पपरेडू) और प्रवेश रावत को गिरफ्तार किया। बाद में फरियादी से आरोपियों की पहचान भी कराई गई। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने अदालत में चालान पेश किया। सुनवाई के दौरान एक आरोपी फरार मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी प्रवेश रावत फरार हो गया। इसके बाद शेष आरोपियों के खिलाफ अदालत में सुनवाई चली। अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 9 गवाहों के बयान दर्ज किए गए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने पहलवान रावत को लूट का दोषी मानते हुए 7 साल की सजा और जुर्माना लगाया। वहीं, वीरेंद्र रावत को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया।


