ग्वालियर के महाराजपुरा थाना क्षेत्र के गिरगांव में एक किसान की जमीन उसके ही कुछ रिश्तेदारों, दलालों और प्रॉपर्टी कारोबारियों ने मिलकर फर्जी तरीके से बेच दी। आरोपियों ने किसान के आधार कार्ड पर फोटो बदलकर जमीन की रजिस्ट्री करा दी। किसान को इस फर्जीवाड़े की जानकारी तब लगी, जब वह अपनी जमीन पर लोन निकालने पहुंचा और पता चला कि जमीन पहले ही बिक चुकी है। इसके बाद किसान ने रजिस्ट्रार कार्यालय से दस्तावेज निकलवाए और पुलिस अधीक्षक से शिकायत की। जांच के बाद पुलिस ने जमीन बेचने और खरीदने वाले 8 आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही है। फोटो बदलकर तैयार किए फर्जी दस्तावेज महाराजपुरा थाना प्रभारी यशवंत गोयल ने बताया कि जितेंद्र सिंह, प्रमोद सिंह, भंवर सिंह और बहादुर सिंह ने अपनी लगभग 11 बीघा जमीन की फर्जी रजिस्ट्री कराए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि फरियादियों के आधार कार्ड पर आरोपियों ने अपने और साथियों के फोटो चस्पा कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए और जमीन बेच दी। पुलिस ने आरोपी देवेंद्र कुमार पाठक निवासी काशीपुरा मुरार, शैलेंद्र सिंह गुर्जर निवासी महाराजपुरा, रामवीर सिंह गुर्जर निवासी महाराजपुरा, रवि आदिवासी निवासी महाराजपुरा, मनोज गुर्जर निवासी रिठौरा, रामवीर सिंह गुर्जर निवासी रिठौरा, हेमसिंह गुर्जर निवासी महाराजपुरा और हरेंद्र सिंह गुर्जर निवासी महाराजपुरा के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। एफआईआर में उप पंजीयक का नाम भी शामिल जमीन फर्जीबाड़े की एफआईआर में तत्कालीन उप पंजीयक मानवेंद्र सिंह भदौरिया का नाम भी शामिल किया गया है। शिकायत में बताया गया है कि जमीन खरीदने वाले आरोपियों ने फरियादी के रिश्तेदारों, रोहित शाक्य निवासी सिंधिया नगर, विनोद गुर्जर और उप पंजीयक के साथ सांठगांठ कर जमीन की रजिस्ट्री करवाई। महीनों के काम चंद दिनों में निपटाए करोड़ों रुपए की जमीन के इस फर्जीवाड़े में चार चतुर कंपनी से जुड़े आरोपी भी शामिल बताए गए हैं। आरोपियों ने पहले किसान की जमीन का फर्जी मुख्तारनामा तैयार कराया, फिर रजिस्ट्री और नामांकन भी करा लिया। जिन प्रक्रियाओं में प्रशासनिक विभागों में महीनों लगते हैं, उन्हें आरोपियों ने चंद दिनों में पूरा कर लिया। इस मामले में सीएसपी महाराजपुरा नागेंद्र सिंह सिकरवार ने बताया कि किसानों के आधार कार्ड पर अन्य लोगों की फोटो चस्पा कर फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन की रजिस्ट्री कराई गई है। आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच की जा रही है कि फर्जी दस्तावेज किसने और कैसे तैयार किए।


