झाबुआ जिले के शिक्षित बेरोजगार युवाओं ने स्थानीय ऑनलाइन परीक्षा केंद्र स्थापित करने की अपनी पुरानी मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ‘बेरोजगार छात्र संगठन’ के बैनर तले सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने राजगढ़ नाके से कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकाली और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन एडीएम सीएस सोलंकी को सौंपा। युवाओं ने ज्ञापन में बताया कि झाबुआ और आलीराजपुर आदिवासी बहुल जिले हैं, जहां अधिकांश परिवार दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए छात्रों को इंदौर, भोपाल या उज्जैन जैसे शहरों में जाना पड़ता है, जिससे उन्हें आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2025 की पुलिस भर्ती परीक्षा में यहां के छात्रों के केंद्र 1000 किलोमीटर दूर रीवा और सीधी जैसे शहरों में आवंटित किए गए। आर्थिक तंगी के कारण कई प्रतिभावान छात्र परीक्षा देने से वंचित रह गए। युवाओं ने परीक्षा बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि फॉर्म भरते समय चार शहरों के विकल्प दिए जाते हैं, लेकिन एडमिट कार्ड में कोई पांचवां शहर आवंटित कर दिया जाता है। छात्रों की मांग है कि उन्हें चुने गए चार विकल्पों में से ही केंद्र मिले। यदि बाहर केंद्र दिया जाता है, तो बोर्ड को यात्रा भत्ता प्रदान करना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने विशेष पिछड़ी जनजातियों (बैगा, सहारिया, भारिया) को मिलने वाले सीधे आरक्षण पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने मांग की कि इन वर्गों को शत-प्रतिशत सीटें देने के बजाय आनुपातिक रूप से सीटें आवंटित की जाएं, ताकि अन्य जनजातीय वर्गों के मेहनती छात्रों का मनोबल प्रभावित न हो। छात्रों ने बताया कि वे 2018, 2021 और 2023 में भी कई बार इस संबंध में आवेदन दे चुके हैं। जिले के पॉलीटेक्निक और इंजीनियरिंग कॉलेजों में पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद परीक्षा केंद्र स्थापित न किया जाना समझ से परे है। युवाओं ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो वे अपने भविष्य के लिए उग्र आंदोलन करने को विवश होंगे।


