भोपाल में निवेश की पथरीली जमीन:आईटी पार्क – 12 साल बाद भी ‘नॉट फाउंड’

एरर 404 : फाइल नॉट फाउंड… इंटरनेट पर जब फाइल नहीं खुलती तो यही मैसेज दिखता है। भोपाल के आईटी पार्क की भी कुछ ऐसी ही स्थिति है। साल 2013 में भोपाल को इसका सपना दिखाया गया था, लेकिन 12 साल बाद भी इसमें 40 आईटी कंपनियां ही आ पाई हैं। दरअसल, पार्क के लिए गांधीनगर क्षेत्र में जो जमीन दी गई, वह ऊबड़-खाबड़ है। निवेशकों को 2-3 साल जमीन समतल करने में ही लग जाते हैं। प्रोजेक्ट डेवलपमेंट की शुरुआती समयसीमा ही 3 साल है। यही वजह है कि यहां नई कंपनियां आने में हिचकिचा रही हैं। आईटी पार्क के डेवलपमेंट का काम मप्र हाउसिंग बोर्ड को मिला था। बोर्ड ने कुछ अंदरूनी रास्ते बनाकर और आधी-अधूरी सीवेज सुविधा देकर पार्क मप्र स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीएसईडीसी) को यह हैंडओवर कर दिया था। इसमें कई प्लॉट भू स्तर से 30 फीट ऊंचे-नीचे हैं। भोपाल को आईटी सिटी बनाने का दावा, एक आईटी पार्क नहीं बसा सके 21 निवेशक तो कानूनी विवाद में ही उलझे 204 एकड़ के पार्क मेंं बमुश्किल 100 एकड़ जमीन आवंटित हुई है। इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर में 21-22 आईटी मैन्युफैक्चरिंग फर्म हैं। वहीं,18 आईटी फर्म हैं। 21 निवेशक अलग-अलग कोर्ट में एमपी स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के साथ कानूनी विवाद में हैं, क्योंकि इनके जमीन आवंटन को रद्द कर दिया गया था। पानी-बिजली कनेक्शन तक नहीं दिए 1जलापूर्ति व ड्रेनेज व्यवस्था पर्याप्त नहीं। बड़ी कंपनियों को हाईटेंशन लाइन कनेक्शन व पानी की व्यवस्था खुद करनी पड़ी।
2 कई निवेशकों को 50 लाख से एक करोड़ रुपए तक की राशि सिर्फ जमीन को समतल करने में ही लगानी पड़ रही है।
3 कॉमन फैसिलिटीज अब भी एमपीएसईडीसी के पास ही हैं। इसे उद्योगों को हैंड ओवर नहीं किया गया है। चिंता… ग्वालियर और जबलपुर में भी यही हाल हमने टेंडर में बता दिया था- भूखंड जैसा है, उसी स्थिति में आवंटित होगा निवेशक भूमि सरंचना देखकर बिल्डिंग डिजाइन करते तो अनावश्यक खर्च से बच सकते थे। टेंडर में साफ लिखा था कि भूखंड जैसी स्थिति में है, वैसा ही आवंटित होगा। पार्क में सीमित लोड के एचटी और एलटी कनेक्शन उपलब्ध हैंl भवन निर्माण के लिए पानी का इंतजाम निर्माणकर्ता को स्वयं करना होता है। यहां 40 कंपनियां हैं। इनमें करीब 2500 युवा काम कर रहे हैं।’ -आशीष वशिष्ठ, एमडी, एमपीएसईडीसी

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