सिंगरौली में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की मंत्री और जिले की प्रभारी मंत्री म्पतिया उइके आज जीरामजी योजना के फायदे बताने सिंगरौली आईं। उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत–जी रामजी अधिनियम 2025’ ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़े बदलाव लाएगा। इस अधिनियम के तहत, ग्रामीणों को अब 100 के बजाय 125 दिन का रोजगार मिलेगा। मंत्री उइके ने 10 जनवरी को सूर्या भवन में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि यदि किसी कारणवश श्रमिकों को काम उपलब्ध नहीं हो पाता है, तो उन्हें स्वतः बेरोजगारी भत्ता प्राप्त होगा। इसके अतिरिक्त, मजदूरी भुगतान में देरी होने पर मुआवजे का भी स्पष्ट प्रावधान किया गया है, जिससे श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे और व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ेगी। अगर मजदूरी का पैसा मिलने में देरी होती है तो रुका हुआ पैसा ब्याज सहित दिया जाएगा। प्रभारी मंत्री ने यह भी बताया कि अब ग्रामसभा को योजना निर्माण की पूरी स्वतंत्रता मिलेगी। इससे गांवों की स्थानीय जरूरतों के अनुसार कार्य तय किए जा सकेंगे, जिससे ग्रामीण विकास में स्थानीय भागीदारी बढ़ेगी। अधिनियम के तहत जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका संवर्धन और जलवायु परिवर्तन से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। इन प्रयासों से गांवों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और ग्रामीण क्षेत्रों से होने वाले पलायन पर प्रभावी रोक लगेगी। उइके ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अधिनियम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा और गांवों को आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर करेगा। प्रेस वार्ता के दौरान मंत्री ने कहा कि इस कानून का मुख्य उद्देश्य ‘हर हाथ को काम’ सुनिश्चित करना और प्रत्येक गांव को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने जोर दिया कि सरकार ग्रामीण क्षेत्रों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना चाहती है, ताकि लोगों को अपने ही गांव में सम्मानजनक रोजगार के अवसर मिल सकें। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इन योजनाओं का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से किया जाए, ताकि इनका वास्तविक लाभ जरूरतमंदों तक पहुंच सके। उन्होंने विश्वास जताया कि यह अधिनियम आने वाले समय में ग्रामीण भारत की तस्वीर बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।


