कबे टुसू जन्म लेलो कबे माइ कहि के गनालि…चौड़ल का चुमावन कर टुसू का किया स्वागत

डीएसपीएमयू में एक दिवसीय टुसू मिलन समारोह का आयोजन विश्वविद्यालय परिसर स्थित अखरा में किया गया। इसकी शुरुआत टुसू के स्वरूप चौड़ल का स्वागत व स्थापना पारंपरिक विधि विधान से की गई। टुसू को अखरा में स्थापना के पूर्व इसके चौड़ल को कुड़माली विभाग से नृत्य-गीत के साथ विश्वविद्यालय कैंपस से बाहर शोभायात्रा के रूप में घुमाया गया। मुकेश कुमार महतो ने टुसू का सेउरना पाठ पेश किया। फिर अतिथियों ने टुसू के चौड़ल पर पुष्पार्पण व चुमावन किया। विभाग के विद्यार्थियों ने स्वागत गीत से अतिथियों का स्वागत किया। मुख्य अतिथि के रूप में विवि के कुलसचिव डॉ. धनंजय वासुदेव द्विवेदी शामिल थे। उन्होंने कहा कि टुसू कृषि से जुड़ा पर्व है, यह पर्व कृषि सभ्यता के विकास का प्रतीक है। परीक्षा नियंत्रक डॉ सुचि संतोष बरवार ने कहा कि टुसू पर्व हमें हमसे विश्वविद्यालय में शिक्षा के साथ अपने संस्कृति से जुड़े रहने का अवसर देता है। झारखंड में 12 महीने में 13 पर्व होते हैं : जिंदर सिंह मुंडा हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ जिंदर सिंह मुंडा ने कहा कि यह झारखंड में 12 महीने में 13 पर्व है, जो यहां की भाषा, संस्कृति एवं सभ्यता की विशेष पहचान है। जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषाओं के समन्वयक सह खोरठा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बिनोद कुमार ने कहा कि टुसू पूरे कुड़माली, खोरठा व पंचपरगना क्षेत्र का प्रमुख कृषि आधारित पर्व है। पहान मुकेश बंसिरिआर ने विधि-विधान से पूजा कराई। उन्होंने पेड़, पौधे, नदी, पहाड़, पर्वत, पानी, आकाश सभी की मंगल कामना के साथ अच्छे फसल की प्रार्थना की। विद्यार्थियों ने नम-नम टुसू मोरी माई की मोहक गीत की प्रस्तुति दी। साथ ही छात्र रमा कुमारी, धनेश्वर ने भी अपनी गीत की प्रस्तुति दी। 35 से 40 छात्र-छात्राओं की टोली ढोल-नगाड़ा की थाप पर पारंपरिक नृत्य की प्रस्तुति दी। छात्राओं की प्रस्तुति में कुछ देर के लिए अतिथियों ने भी ताल से ताल मिला कर साथ दिया। जिसका सभी ने स्वागत किया। मौके पर विवि के वित्त पदाधिकारी डॉ अनिता मेहता, बीएड के डॉ पारितोष मांझी, डॉ तनुजा, डॉ अजिता, डॉ रीना जया, डॉ रियाज हसन, डॉ सीता कुमारी समेत शोधार्थी, विद्यार्थी मौजूद थे।

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