खिलचीपुर सिविल अस्पताल में प्रसूताओं के पोषण से खिलवाड़:पानी जैसी पतली दाल व कम आहार परोसा जा रहा; अस्पताल प्रबंधन बेखबर

राजगढ़ जिले के खिलचीपुर सिविल अस्पताल में प्रसूताओं को दिए जाने वाले सरकारी पोषण आहार में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। यहां सरकार द्वारा तय मैन्यू केवल कागजों तक सीमित रह गया है, जबकि हकीकत में ठेकेदार अपनी बचत के लिए महिलाओं के स्वास्थ्य से खुला समझौता कर रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अस्पताल प्रबंधन इस पूरे मामले पर कोई ध्यान नहीं दे रहा और अब तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी जांच के लिए अस्पताल नहीं पहुंचा है। रविवार को दैनिक भास्कर की टीम जब अस्पताल पहुंची, तब भर्ती प्रसूता महिलाओं को ठेकेदार के कर्मचारियों द्वारा भोजन वितरित किया जा रहा था। थाली में 4 रोटी, चावल, बेहद पतली पानी जैसी तुअर दाल और आलू-पत्ता गोभी की सब्जी दी गई। जबकि अस्पताल की दीवार पर लगे सरकारी मैन्यू में महिलाओं के लिए कहीं अधिक पौष्टिक भोजन निर्धारित है। मैन्यू अनुसार, दूध-दलिया, फल परोसना था
मैन्यू के अनुसार रविवार को नाश्ते में चाय, बिस्किट, दूध, दलिया के साथ पपीता दिया जाना था, लेकिन महिलाओं को पपीता नहीं दिया गया। इसी तरह मैन्यू में स्पष्ट रूप से दो गुड़-मेवा लड्डू देने का प्रावधान है, लेकिन यहां प्रत्येक महिला को सिर्फ एक-एक लड्डू थमाया गया। यानी सीधे तौर पर तय आहार में कटौती की गई। सुबह के मुख्य भोजन में सलाद, रोटी, मूंग दाल, चावल और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हरी सब्जी शामिल थी, लेकिन मौके पर स्थिति बिल्कुल उलट मिली। सलाद पूरी तरह गायब था। मूंग दाल की जगह तुअर की अत्यंत पतली दाल परोसी गई, जो पोषण के नाम पर सिर्फ पानी जैसी थी। हरी सब्जी की जगह ठेकेदार ने लागत बचाने के लिए आलू और पत्ता गोभी की सब्जी बनवा दी। प्रसूताओं ने बताया कि उन्हें न तो मैन्यू के अनुसार पूरा भोजन मिल रहा है और न ही पर्याप्त मात्रा। महिलाओं का कहना है कि प्रसव के बाद शरीर को ताकत देने वाला आहार जरूरी होता है, लेकिन अस्पताल में उन्हें आधा-अधूरा और घटिया खाना दिया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन इस पूरे मामले से बेखबर
गंभीर सवाल यह भी है कि अस्पताल प्रबंधन इस पूरे मामले से बेखबर बना हुआ है या जानबूझकर आंखें मूंदे बैठा है। प्रसूता वार्ड में भोजन का मैन्यू भी ऐसी जगह लगाया गया है, जहां किसी की नजर मुश्किल से पड़े। इससे साफ है कि गड़बड़ी को छिपाने की कोशिश की जा रही है। टेंडर की शर्तों के अनुसार भोजन में बासमती चावल दिए जाने थे, लेकिन महिलाओं को बेहद हल्की और निम्न गुणवत्ता के चावल परोसे जा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली महिलाएं सरकारी योजनाओं के भरोसे अस्पताल पहुंचती हैं, लेकिन यहां ठेकेदार की मनमानी और प्रशासन की लापरवाही उनके स्वास्थ्य पर भारी पड़ रही है। इस मामले में अस्पताल प्रबंधन की ओर से किसी जिम्मेदार का पक्ष सामने नहीं आया है।

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