भास्कर न्यूज | कांकेर शहर के माहुरबंदपारा वार्ड में भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। दूसरे दिन कथावाचक संतोष मिश्रा ने कहा कि हम सब प्रकृति के अधीन हैं और प्रकृति भगवान के अधीन होती है। भगवान के बिना इच्छा एक पत्ता भी नहीं डोल सकता है। माहुरबंदपारा में श्रीमद् भागवत कथा 10 जनवरी से शुरू हुई। कथा का समापन 18 जनवरी को होगा। कथा का आयोजन वार्डवासियों द्वारा आपस में सहयोग कर कराया जा रहा है। कथा आयोजन से वार्ड में भक्तिमय माहौल हो गया है। कथा दोपहर 1 बजे शुरू होकर शाम 6 बजे तक चलती है। राजिम वाले पंडित संतोष मिश्रा ने कथा के दूसरे दिन कहा भूमि, जल, वायु, आकाश यह सब प्रकृति है। इन सबके कारण ही मनुष्य के साथ जीव जंतुओं का जीवन चक्र चल रहा है। प्रकृति परमात्मा के अधीन है। भगवान के इच्छा से ही प्रकृति सारी क्रिया करती है। भगवान के इच्छा के बिना एक पत्ता भी नहीं डोल सकता है। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष के लिए भगवान के चरणों का स्मरण करना चाहिए। कथा के पहले दिन दोपहर 3 बजे कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा शीतला मंदिर पहुंची जहां कलश पूजा के बाद यात्रा अलबेलापारा तालाब पहुंची। तालाब में जल पूजा की गई। यहां से कलश मेंं जल लेकर कथा स्थल पहुंची। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में वार्डवासियों ने भाग लिया। पहले दिन कथा सुनाते कथावाचक ने कहा की भगवान के कृपा से ही जीव का कल्याण हो सकता है। जिसका भाग्य होता है उसे ही भागवत कथा सुनने को मिलती है। मनुष्य ही भागवत कथा सुन सकते हैं। देवताओं के लिए भी भागवत कथा दुर्लभ है। भागवत कथा में 12 स्कंध: कथावाचक पंडित संतोष मिश्रा ने कहा कि भागवत कथा में 12 स्कंध हैं तथा 19 अध्याय हैं। वेद व्यास ने चारो वेद ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद,अथर्ववेद को संकलित करने का काम किया। कथा व कहानी में काफी अंतर है। कहानी समाप्त की जाती है जबकि कथा को विश्राम दिया जाता है। हरि अनंत हैं। सभी पुराणों में भागवत कथा सर्वश्रेष्ठ है। भगवान विष्णु के एक नहीं 24 अवतार हैं। भगवान हरि संपूर्ण लोक की रचना तथा पालन पोषण करते हैं। परमात्मा एक है, लेकिन उनके तीन स्वरूप ब्रम्हा, विष्णु व महेश हैं। मनुष्य जीवन का परम लक्ष्य भगवान की भक्ति व प्रेम होना चाहिए। भागवत कथा एक कान से सुनकर दूसरे से निकालना नहीं चाहिए। ध्यान से सुनकर जीवन में आत्मसात करना चाहिए। भागवत कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला पुरुष पहुंच रहे हैं। माहुरबंदपारा के साथ जवाहर वार्ड, अलबेलापारा, शिवनगर, आमापारा, एकता नगर से श्रध्दालु पहुंच रहे हैं। भागवत कथा में भजन कीर्तन भी किया जा रहा है। हर दिन अलग-अलग कथा 12 जनवरी को सती चरित्र, ध्रुव चरित्र कथा सुनाई जाएगी। 13 जनवरी को प्रहलाद चरित्र कथा सुनायी जाएगी। 14 जनवरी को श्री राम, कृष्ण प्राकट्य जन्मोत्सव की कथा सुनायी जाएगी। 15 जनवरी को बाल लीला, गोवर्धन पूजा, 16 जनवरी को रूखमनी मंगल विवाह कथा, 17 जनवरी को सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष, चढ़ोतरी, तुलसी वर्षा कथा सुनाई जाएगी। 18 जनवरी को गीता ज्ञान, कपिला तर्पण, सहस्त्रधारा तथा पूर्णाहुति की जाएगी।


