विदिशा में बेतवा नदी के बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ बेतवा उत्थान समिति ने गुरुवार को माधवगंज चौराहे पर धरना प्रदर्शन किया। समिति ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते नदी को नालों के जहरीले पानी से नहीं बचाया गया, तो विदिशा को भी बड़ी त्रासदी का सामना करना पड़ सकता है। प्रदर्शनकारियों ने इंदौर की हालिया घटना का हवाला दिया, जहां प्रदूषित जल के कारण 21 लोगों की जान चली गई थी। समिति ने कहा कि उनका उद्देश्य प्रशासन को जगाना है, ताकि विदिशा में ऐसी घटना न दोहराई जाए। उनके अनुसार, शहर के पांच बड़े नालों का गंदा और जहरीला पानी सीधे बेतवा में मिल रहा है, जिससे जलीय जीवन और शहरवासियों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। दावों के बावजूद हकीकत में बदलाव नहीं
प्रदर्शनकारियों ने सरकार और जनप्रतिनिधियों पर बेतवा की सफाई को लेकर पिछले 40 वर्षों से किए जा रहे बड़े-बड़े दावों को पूरा न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हर चुनाव में नदी को शुद्ध करने के वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत में कोई बदलाव नहीं आया है। बेतवा उत्थान समिति ने मांग की कि शहर के पांचों प्रमुख नालों के प्रदूषित जल को तत्काल नदी में मिलने से रोका जाए। साथ ही, नदी की तलहटी में जमा गंदगी और जहरीले तत्वों की सफाई के लिए ठोस और समयबद्ध योजना बनाई जाए। समिति ने स्पष्ट किया कि यह धरना केवल विरोध नहीं, बल्कि प्रशासन को चेताने और जनता को जागरूक करने का अभियान है। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि शासन-प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह जनचेतना अभियान आगे चलकर उग्र आंदोलन का रूप ले सकता है। धरने में मौजूद स्थानीय नागरिकों ने भी आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि बेतवा उनकी आस्था से जुड़ी है और वे इसे गंदा नाला बनते हुए नहीं देख सकते।


