वनग्राम कोटा में मूलभूत सुविधाओं का अभाव:ग्रामीण सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित

बालाघाट जिले के लामता क्षेत्र की पाद्रीगंज पंचायत में स्थित वनग्राम कोटा, आजादी के 75 साल बाद भी विकास से कोसों दूर है। यहां के ग्रामीण सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। ग्राम में सुविधा के नाम पर केवल एक बिजली का कनेक्शन है, जिसे 15 साल पहले तत्कालीन विधायक दरबूसिंह ने लगवाया था। सामान्य दिनों में ग्रामीण पोलदा नदी पार कर महू बाजार पहुंचते हैं, लेकिन बरसात के दौरान नदी में पानी बढ़ने से उन्हें पड़ोसी जिले मंडला के चिरईडोंगरी नैनपुर जाना पड़ता है। करीब 25 से 30 परिवारों और 100 से कम आबादी वाले इस वनग्राम के लोग विधानसभा और लोकसभा चुनावों में मतदान करते हैं। इसके बावजूद, न तो वन विभाग ने इसके विकास के लिए कोई पहल की है और न ही प्रशासन ने इस ओर ध्यान दिया है। गांव तक पहुंचने के लिए आज भी पक्की सड़क का अभाव है। कुछ स्थानों पर पुलिया का निर्माण किया गया है, लेकिन सड़क न होने के कारण वे अनुपयोगी साबित हो रही हैं। उबड़-खाबड़ रास्तों के कारण वनग्राम तक पहुंचना बेहद मुश्किल है। ग्रामीण पीतम कुसरे और बसंती बाई ने बताया कि मूलभूत सुविधाओं के अभाव में उन्हें कठिनाई भरा जीवन जीना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में गांव का संपर्क पूरी तरह कट जाता है। सड़क के अभाव में बीमारों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल तक पहुंचाना एक बड़ी चुनौती है। कई बार मरीजों को चारपाई या कंधों पर उठाकर मुख्य मार्ग सोनखार तक लाना पड़ता है, जिससे समय पर इलाज न मिलने के कारण कुछ ग्रामीणों की जान भी जा चुकी है। गर्भवती महिलाओं को प्रसव के समय सबसे अधिक परेशानी होती है। इस गांव तक सड़क और नदी में पुल नही होने के कारण एम्बुलेंस या कोई भी चार पहिया वाहन की सुविधा नही मिल पाती है। इसलिए गर्भवती महिला को गांव में ही डिलेवरी कराया जाता है।
वन ग्राम कोटा की हालत देखकर लगता है कि शासकीय योजनाएं कागजों में हैं, जबकि जमीनी स्तर पर इसका कोई लाभ नहीं मिला है। सड़क, पानी, स्वास्थ्य और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ गांव तक नहीं पहुंच पाया है। यहां सभी मकान कच्चे है, जिससे साफ है कि हर गरीब के सिर पर छत का सपना, यहां के लोगों के लिए केवल सपना ही है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि वन ग्राम कोटा तक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए।
अधूरी योजनाओं की जमीनी जांच हो। स्वास्थ्य सुविधा एवं एंबुलेंस पहुंच सुनिश्चित की जाए। वन ग्राम को शासकीय योजनाओं से जोड़ा जाए।

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